पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से अमेरिका ने बताया था खतरा, अब शांति वार्ता में मध्यस्थता के लिए शहबाज लगा रहे एड़ी चोटी का जोर; ये है असली चाल
मिडिल ईस्ट में मचे बवाल के बीच कूटनीति की बिसात पर चालें बहुत तेजी से बदली जा रही हैं। एक तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच गुपचुप ‘डील’ और बातचीत की अटकलें तेज हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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मिडिल ईस्ट में मचे बवाल के बीच कूटनीति की बिसात पर चालें बहुत तेजी से बदली जा रही हैं। एक तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच गुपचुप ‘डील’ और बातचीत की अटकलें तेज हैं, तो दूसरी तरफ कूटनीति का असली केंद्र नई दिल्ली बनता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान जंग 5 दिन रोकने का ऐलान किया और अगले ही दिन सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की।
दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप ने ऐलान के बाद से 24 घंटों में किसी और देश के नेता से फोन पर सीधी बातचीत की हो, फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। इन सबके बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शांति वार्ता में मध्यस्थता के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान चाहता है कि शांति वार्ता में मध्यस्थता वो ही करे। इसके पीछे पाकिस्तान की एक बड़ी चाल है।
अमेरिका को खुश करने की चाल
पाकिस्तान खुद को अमेरिका का बड़ा मददगार साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सूत्रों की मानें तो इस्लामाबाद को वार्ता के लिए एक सुरक्षित 'वेन्यू' के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, यह वही पाकिस्तान है जिसने ईरान पर हमले की स्थिति में इजराइल को निशाना बनाने की बात कही थी। अब अपनी आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच, पाकिस्तान अपनी 'चमचागिरी' वाली छवि के साथ अमेरिका को खुश करने में जुटा है।
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आर्थिक और घरेलू चुनौतियां
मौजूदा समय में पाकिस्तान आर्थिक संकट, प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। शांति की पेशकश से व्यापार, पानी और अन्य मुद्दों पर राहत मिल सकती है। घरेलू स्तर पर आर्मी की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए भी तनाव कम होगी।
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अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारना असली वजह
पाकिस्तान भारत पर "आक्रामक" होने का आरोप लगाते हुए खुद को "शांति चाहने वाला" दिखाना चाहता था। US और अन्य देशों की मध्यस्थता में बातचीत से पाकिस्तान को डिप्लोमेटिक फायदा मिलेगा। हालांकि यह वार्ता शांति की कोशिश कम और पाकिस्तान की 'इमेज बिल्डिंग' की कवायद ज्यादा नजर आती है। इजराइल को बाहर रखकर ईरान के साथ किसी भी स्थाई समझौते पर पहुँचना नामुमकिन है। यह कूटनीतिक ड्रामा अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख को और भी उलझा सकता है।
अमेरिका ने पाकिस्तान को बताया था परमाणु खतरा
गबार्ड ने रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान को उन देशों में शामिल किया जिनके उन्नत मिसाइल सिस्टम अमेरिकी को पहुंच में ला सकते हैं। पाकिस्तान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकास संभावित रूप से अंतरमहाद्वीपीय तक पहुंच सकता है जो को निशाना बना सकें। रिपोर्ट में पाकिस्तान को कई श्रेणियों में खतरे के रूप में रखा गया है, जिसमें डिलीवरी सिस्टम की रेंज और सटीकता में वृद्धि शामिल है।