युद्ध बड़ा भीषण होगा... स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाज पर ईरान के हमले के बाद ट्रंप ने बुलाई मीटिंग, तो क्या अब फिर शुरू होगा हमला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक बुलाई, जिसमें होर्मुज संकट और संभावित समझौते पर चर्चा हुई।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक बुलाई, जिसमें होर्मुज संकट और संभावित समझौते पर चर्चा हुई। बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अलावा सीआईए निदेशक और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख शामिल हुए।
आपको बता दें कि ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि समझौता जल्द संभव है, लेकिन ईरान ने होर्मुज को फिर बंद कर तनाव बढ़ा दिया। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में मध्यस्थता की, और ट्रंप ने उनसे फोन पर चर्चा की। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल नए अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रही है।
ट्रंप का सख्त रुख
ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि ईरान ब्लैकमेल नहीं कर सकता, वरना हालात बिगड़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि पूर्ण समझौते तक अमेरिकी सेना होर्मुज क्षेत्र में रहेगी।
मध्य पूर्व के दूसरे मोर्चे पर इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में 'येलो लाइन' नामक नई सैन्य सीमा घोषित की है। सेना ने हिजबुल्लाह ठिकानों, सुरंगों और युद्धविराम तोड़ने वालों पर हमले किए। हाल के 10 दिवसीय युद्धविराम के बावजूद जमीन पर गोलीबारी जारी है।
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UAE की बड़ी चेतावनी, सिर्फ सीजफायर नहीं, ईरान के पूरे खतरे खत्म करना जरूरी
यूएई के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री सईद बिन मुबारक अल हाजरी ने साफ कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच 39 दिन की जंग के बाद हुआ सीजफायर काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि स्थायी समाधान के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल, ड्रोन और उसके सहयोगी नेटवर्क पर भी कार्रवाई जरूरी है।
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अल हाजरी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी पूरी तरह खुला नहीं है और ईरान जहाजों से परमिशन और टोल ले रहा है। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि भारत अपनी तेल, एलपीजी और उर्वरक जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है। उन्होंने इसे आर्थिक दबाव बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कदम उठाने की मांग की है।