अपडेटेड 17 March 2026 at 14:07 IST

'इस्लामोफोबिया के नाम पर नरसंहार और अत्याचार...', UN में भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा, जानिए क्या-क्या कहा, VIDEO

अंतरराष्ट्रीय इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस के अवसर पर यूएन महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने एक बार फिर पाकिस्तान को जमकर लताड़ा। रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर हो रहे हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की।

India slams Pakistan at UN
UN में भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा | Image: X

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के फर्जी प्रोपेगैंडा को लेकर एक बार फिर कड़ा प्रहार किया। अंतरराष्ट्रीय इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस के अवसर पर यूएन महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश (पी. हरीश) ने स्वार्थी उद्देश्यों के लिए धार्मिक पहचान के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। हरीश ने रमजान के पवित्र महीने में भारत के पड़ोसी देशों में हो रहे अत्याचारों पर भी प्रकाश डाला साथ ही संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के दोहरे रवैया कि बखिया उधेड़ दीं।

पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां दुनिया के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के लोग शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहते हैं। हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख जैसे चार प्रमुख धर्मों की जन्मभूमि होने के नाते भारत धार्मिक भेदभाव मुक्त समाज की आवश्यकता को किसी अन्य देश से बेहतर समझता है। उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला कि यह देश अपने आसपास इस्लामोफोबिया की काल्पनिक और मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने में माहिर है।

पर्वतनेनी हरीश ने UN में क्या-क्या कहा?

भारत के राजदूत ने सवाल उठाया  कि "ऐसे में उस देश में अहमदिया समुदाय के खिलाफ हो रहे क्रूर दमन को क्या कहा जाएगा? बेबस अफगानों की बड़े पैमाने पर जबरन वापसी (रिफ्यूलमेंट) को किस रूप में देखा जाएगा? और पवित्र रमजान के महीने में किए गए हवाई हमलों को क्या नाम दिया जाएगा?"  उन्होंने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मंच का अपने संकीर्ण राजनीतिक फायदे के लिए दुरुपयोग करता है और इसी के आधार पर भारत के खिलाफ झूठे व निराधार आरोप लगवाता है।

किसी भी धर्म को विशेष दर्जा देना गलत

पर्वतनेनी हरीश ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र की परिकल्पना एक ऐसी संस्था के रूप में की गई थी जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर हो। इसलिए, हम ऐसे ढांचों के प्रति सावधानी बरतने का आग्रह करते हैं जो केवल एक ही आस्था पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हैं, और धर्म-द्वेष (religiophobia) की व्यापक घटना के सभी रूपों को संबोधित नहीं करते। यही कारण है कि हमारी नजर में, 'धर्म या आस्था पर आधारित असहिष्णुता और भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर 1981 की घोषणा' एक बहुत ही संतुलित और स्थायी दस्तावेज बनी हुई है, जो किसी भी धर्म को विशेष दर्जा दिए बिना, सभी धार्मिक अनुयायियों के अधिकारों को सुनिश्चित करती है।"

Advertisement

भारत में सभी धर्मों का सम्मान-पर्वतनेनी हरीश

युक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने जोर देकर कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग स्वतंत्र रूप से अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और वे उनकी असली आवाज बनते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह अपना समय और संसाधन किसी एक धर्म पर केंद्रित करने के बजाय समावेशी समाज के निर्माण में लगाए, जहां हर धर्म के व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और समानता सुनिश्चित हो। बता दें कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने हाल के दिनों में अफगानिस्तान पर रमजान के दौरान कई हवाई हमले किए, जिनमें सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की मौत हुई और लाखों विस्थापित हुए। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का घोर उल्लंघन करार दिया है।

यह भी पढ़ें: काबुल के अस्पताल पर PAK की एयरस्ट्राइक, 400 लोगों की मौत का दावा

Advertisement

Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 17 March 2026 at 14:07 IST