स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाने पर भड़का भारत, UN में कहा- हमला बर्दाश्त नहीं, 4 दिन पहले भारतीय जहाज पर हुआ था अटैक

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर किए जाने वाले हमलों की निंदा की। UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने कहा कि जहाजों पर सवार नागरिकों को खतरे में डालना और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रोकना बिल्कुल गलत है।

India at UN on Ships attacked strait of Hormuz
होर्मुज में तनाव पर भारत का बड़ा बयान | Image: AI Photo

India at UN: अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर जारी हो, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अब भी बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर स्थिति नाजुक है। हालात कभी भी फिर बिगड़ सकते हैं। इस बीच भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाया। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज में जहाजों पर हमला करने, निशाना बनाने, चालक दल को खतरे में डालना और जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को बाधित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का हर हाल में सम्मान होना चाहिए।

ये बातें संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (UNECOSOC) की विशेष बैठक में कहीं। उन्होंने मौजूदा संकट से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों के संयोजन पर भी जोर दिया। बैठक वैश्विक ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।

13 मई को ओमान में हुआ था हमला

संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से ये बयान ऐसे समय में आया जब हाल ही में ओमान के तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला हुआ था। जहाज सोमालिया से आ रहा था। इसी दौरान 13 मई को इस पर हमला हुआ। हालांकि ओमान के अधिकारियों ने जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया था। भारत सरकार की ओर से पहले भी कहा जा चुका है कि इस तरह की घटना अस्वीकार्य है।

होर्मुज के लिए ईरान का नया शिपिंग मैकेनिज्म 

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए एक पेशेवर और व्यवस्थित तंत्र तैयार करने की घोषणा कर दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि इस नई व्यवस्था के तहत केवल वे वाणिज्यिक जहाज और पक्ष ही इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे, जो ईरान के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन विशेष सेवाओं के एवज में शुल्क भी वसूला जाएगा। साथ ही, तथाकथित ‘फ्रीडम प्रोजेक्ट’ से जुड़े ऑपरेटरों के लिए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा।

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Published By:
 Ruchi Mehra
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