अपडेटेड 6 March 2026 at 08:17 IST

रूस से तेल खरीद सकेगा भारत, अमेरिका ने 30 दिनों के लिए दी छूट, ईरान से जंग के बीच क्यों बदला ट्रंप का मूड?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच ईरान के बीच जारी जंग के चलते पूरी दुनिया में तेल संकट गहरा सकता है। इसे देखने हुए अमेरिका भारत पर मेहरबान हुआ है और रूस से तेल खरीदने के लिए छूट दे दी है।

US WAIVERS RUSSIAN OIL IMPORTS FOR INDIA
रूसी तेल को लेकर अमेरिका ने दी भारत को छूट | Image: Republic

Russian Oil: ईरान के साथ जारी जंग के बीच रूसी तेल खरीदने के लिए ट्रंप के तेवर नरम पड़े हैं। अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दे दी है। हालांकि ये अनुमित केवल 30 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर दी गई है। अमेरिका ने कहा है कि यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह बनाए रखने के लिए लिया गया है।

दरअसल, अमेरिका ही भारत पर रूसी तेल की खरीद बंद करने का दबाव बना रहा था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री तेल मालवाहक जहाजों की आवाजाही बंद होने की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दी है।

क्यों लिया गया ये फैसला? 

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने X पर एक पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडा की वजह से तेल और गैस का प्रोडक्शन अब तक के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए, ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर अल्पकालिक उपाय रूसी सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ प्रदान नहीं करेगा, क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से फंसे तेल से जुड़े लेनदेन को अधिकृत करता है।”

उन्होंने कहा कि भारत, अमेरिका का एक जरूरी पार्टनर है। हम पूरी तरह से उम्मीद करते हैं कि नई दिल्ली अमेरिका से तेल की खरीद में तेजी लाएगी। यह अंतरिम व्यवस्था ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को 'बंधक' बनाने की कोशिशों से उत्पन्न दबाव को कम करने में मदद करेगी।

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समुद्र में क्यों खड़े थे रूस के तेल टैंकर? 

अमेरिका के इस फैसले से समुद्र में फंसे रूसी तेल टैंकरों को बड़ी राहत मिलने वाली है, क्योंकि अब इन्हें खरीदार आसानी से मिल सकेंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये रूसी तेल जहाज समुद्र में इसलिए अटके हुए थे क्योंकि अमेरिका के नए प्रतिबंधों के कारण भुगतान व्यवस्था, बीमा कवर और अन्य अनिश्चितताओं ने उनके तेल को तुरंत उतारना मुश्किल बना दिया था।

अमेरिका ने रूसी तेल टैंकरों पर पहले काफी सख्त पाबंदियां लगाई थीं, जिससे इन जहाजों के बीमा, पेमेंट सिस्टम और बंदरगाह में प्रवेश को लेकर कई सवाल खड़े हो गए थे। इस वजह से भारतीय तेल रिफाइनरियों ने भी रूस से तेल खरीदने में संकोच करना शुरू कर दिया था कि कहीं ये कदम प्रतिबंधों का उल्लंघन न माना जाए। नतीजतन, कई टैंकरों को समुद्र में ही रोका गया और वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

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अब अमेरिका द्वारा दी गई इस अस्थायी छूट के बाद इन अटके हुए टैंकरों के लिए खरीदार मिलने की संभावना मजबूत हो गई है, खासकर भारत जैसे देशों के लिए, जिससे ये जहाज अब आगे बढ़ सकेंगे।

रूस से तेल खरीदता रहा भारत

दरअसल, साल 2022 में रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद रूसी तेल का भारत सबसे बड़े खरीदार में से एक बना हुआ था। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी। इसके लिए अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया था।

फरवरी 2026 में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता हुआ। इसके तहत अमेरिका ने भारत पर लगे अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ को हटा दिया। भारत पर लगा कुल टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया। इसके बदले भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने या काफी कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। 

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 6 March 2026 at 08:02 IST