नेपाल बाढ़ में मौत का आंकड़ा बढ़कर हुआ 1355 के पार, त्रासदी में जान गंवाने वालों की याद में मनाया गया शोक दिवस, PM बालेन शाह ने क्या कहा?
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,355 हो गई है। बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट और धादिंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। जहां बुनियादी ढांचे, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण NDRRMA के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,355 हो गई है। 26 अगस्त को आई इस भयंकर आपदा में जान गंवाने वाले नागरिकों के सम्मान में देश भर में राष्ट्रीय शोक मनाया गया। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय द्वारा ली गई कैबिनेट बैठक के निर्णय के तहत देश के सभी सरकारी कार्यालयों, विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों और राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया गया।
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिससे घर, सड़कें, पुल, जलविद्युत संयंत्र और आवश्यक बुनियादी ढांचा पूरी तरह ठप हो गया है।
सुरक्षा बलों का जांबाज रेस्क्यू अभियान और जेल हादसा
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय समुदाय और अंतरराष्ट्रीय भागीदार युद्धस्तर पर खोज, बचाव और राहत वितरण अभियान चला रहे हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालन) शाह ने सुरक्षाकर्मियों के साहसिक कार्यों की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) के संयुक्त अभियानों के माध्यम से अब तक हवाई और जमीनी रास्तों से 13,391 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
वर्तमान में सेना के 9,287, पुलिस के 7,975 और APF के 4,203 जवान रात-दिन राहत कार्य में जुटे हैं। हालांकि, इस त्रासदी में 82 सुरक्षाकर्मी सेना के 45, पुलिस के 25 और APF के 12 स्वयं लापता हैं। नुवाकोट के बिदुर-6 स्थित खम्पा कैंप जेल में बाढ़ का पानी भरने के बावजूद 52 पुलिस कर्मियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए 923 कैदियों को सुरक्षित ऊंचे स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान क्षतिग्रस्त दीवार से भागने की कोशिश कर रहे 50 कैदियों को फिर से पकड़ लिया गया।
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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और भारतीय टीमों का सहयोग
भारत की सिल्क्यारा सुरंग में 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने वाले प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी नेपाल में राहत अभियानों का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने इस आपदा को बेहद जटिल और बहुस्तरीय बताया, जहां एक साथ कई स्थानों पर जिंदगियों को बचाना एक बड़ी चुनौती है। डिक्स ने 'धर्म' और कर्तव्यनिष्ठा के पूर्वी दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सही काम करते रहना ही सबसे बड़ी परीक्षा है।
इसके साथ ही, भारत सरकार की ओर से भी त्वरित सहायता प्रदान की गई है। भारतीय तकनीकी टीम चिलिमे सुरंग को साफ करने और भारी मशीनों की आवाजाही के लिए एक किलोमीटर लंबा अस्थायी मार्ग तैयार करने में जुटी है। वहीं, भारतीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की प्रयोगशालाओं में 400 से अधिक डीएनए नमूनों का प्रसंस्करण कर चुकी है और 70 डीएनए प्रोफाइल तैयार कर लिए हैं।
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गोरखा में नया अलर्ट
नेपाल सरकार ने घोषणा की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी पत्रकारों को सूचना एवं प्रसारण विभाग (DOIB) से आधिकारिक प्रेस मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा। दूसरी ओर, गोरखा जिले की थेरांग नदी में आई नई बाढ़ के कारण बुधिगंडकी घाटी क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया गया है। बाढ़ में चार मकान और एक झूला पुल बह जाने से मनास्लु क्षेत्र में ट्रैकिंग करने वाले पर्यटकों के लिए मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।