Iran-Israel जंग के बीच चीन ने ताइवान एयरस्पेस में गुपचुप तरीके से लगाया 'LOCKDOWN', टेंशन में अमेरिका; कुछ बड़ा करने वाला है ड्रैगन?

चीन के एक फैसले ने खलबली मचा दी है। चीन ने बिना कोई वजह बताए अपने पूर्वी समुद्री इलाके में गुपचुप तरीके से 40 दिन तक बड़ा एयरस्पेस बंद कर दिया है।

China announces restricted airspace off its coast for 40 days without explaining move america japan in tension
Iran-Israel जंग के बीच चीन ने ताइवान एयरस्पेस में गुपचुप तरीके से लगाया 'LOCKDOWN', टेंशन में अमेरिका; कुछ बड़ा करने वाला है ड्रैगन? | Image: Pixabay

ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग का आज 38वां दिन है। इस युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर साफ दिखाई दे रहा है। इस बीच चीन के एक फैसले ने खलबली मचा दी है। चीन ने बिना कोई वजह बताए अपने पूर्वी समुद्री इलाके में गुपचुप तरीके से 40 दिन तक बड़ा एयरस्पेस बंद कर दिया है। ये एयरस्‍पेस 27 अप्रैल से 6 मई तक बंद रहेंगे। यह एयरस्पेस दक्षिण कोरिया के पास येलो सी से जापान के पास ईस्ट चीन सी तक फैला हुआ है।

इससे जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों में चिंता बढ़ गई है। आपको बता दें कि आमतौर पर ऐसे प्रतिबंध सैन्य अभ्यास या मिसाइल परीक्षण के समय लगाए जाते हैं, लेकिन इस बार कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, बिना किसी आधिकारिक अभ्यास की घोषणा के इतने लंबे समय तक आसमान को ब्लॉक करना चीन की किसी नई और खतरनाक मिसाइल तकनीक के परीक्षण या बड़े युद्ध अभ्यास की तैयारी हो सकती है।

पहले भी चीन कर चुका है ऐसा 'लॉकडाउन' लेकिन सिर्फ 2-3 दिनों के लिए

पहले भी चीन ऐसे प्रतिबंध लगाता रहा है, लेकिन वे आमतौर पर 2-3 दिन के होते थे और उनके पीछे स्पष्ट कारण होते थे। इस बार 40 दिन तक बिना वजह प्रतिबंध रहना असामान्य है। ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि चीन यह कदम जापान और अमेरिका को चेतावनी देने के लिए उठा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया का ध्यान मिडिल ईस्ट की घटनाओं पर है। इस तरह के लंबे प्रतिबंध से चीन अपनी सैन्य ताकत को धीरे-धीरे स्थापित कर रहा है और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

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चीन-ताइवान विवाद की जड़ें

चीन ताइवान को अपना एक प्रांत मानता है और उसने 2027 तक इसे मुख्य भूमि में मिलाने का लक्ष्य रखा है। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश मानता है जिसकी अपनी सरकार और सेना है। 1949 के गृहयुद्ध के बाद से ही दोनों के बीच विवाद बना हुआ है। हाल के वर्षों में चीन ने ताइवान पर दबाव बढ़ाने के लिए सैन्य और आर्थिक हथकंडे अपनाए हैं, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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अमेरिका के लिए होंगी ये मुश्‍किलें

अमेरिका अभी ईरान युद्ध में पूरी ताकत झोंक चुका है. उसके हजारों सैनिक, जेट, ड्रोन और जहाज मिडिल ईस्ट में व्यस्त हैं। अब चीन के इस 40 दिन के बंद से अमेरिका की मिलिट्री फ्लाइट्स प्रभावित होंगी। अमेरिकी एयर फोर्स और नेवी के जेट, बॉम्बर और जासूसी विमान जापान, दक्षिण कोरिया और गुआम के बेस से उड़ान भरते हैं। अब इन इलाकों में सीधे उड़ान भरना मुश्किल हो गया। विमानों को घुमाकर लंबा रास्ता चुनना पड़ेगा, जिससे समय, ईंधन और पैसा ज्यादा लगेगा।

इसके अलावा अमेरिका, चीन की निगरानी के लिए इस इलाके से लगातार जासूसी विमान उड़ाता है। 40 दिन तक यह आसान नहीं रहेगा। चीन को अपनी कोई भी मिलिट्री एक्टिविटी बिना अमेरिकी नजर में किए करने का मौका मिल गया। अमेरिकी सेना पहले ही ईरान के नए एयर डिफेंस, ड्रोन और मिसाइलों से जूझ रही है। अब चीन ने एशिया में भी तनाव बढ़ा दिया। पेंटागन को अब दोनों तरफ सेना और संसाधन बांटने पड़ेंगे।

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Published By :
Ankur Shrivastava
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