रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत-चीन पर लग सकता है 100% टैरिफ, ट्रंप ने बिल का किया समर्थन; पहले 500% की दी गई थी धमकी

अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल का नया ड्राफ्ट पेश किया है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप का समर्थन मिला है। इसके तहत रूसी तेल खरीदने के कारण भारत और चीन पर अब 500% की जगह अधिकतम 100% तक टैरिफ लग सकता है।

US Tariff on India China
भारत-चीन पर टैरिफ लगाएगा अमेरिका | Image: Reuters

US Tariff: रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले अमेरिका के तेवर फिर बदल गए हैं। अब टैरिफ को 500% से घटाकर 100% कर दिया गया है। अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार (14 जुलाई) को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल का नया ड्राफ्ट पेश किया है। इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों जैसे भारत और चीन पर पहले प्रस्तावित 500% टैरिफ को कम कर दिया गया है।

टैरिफ को किया गया कम

बिल को सबसे पहले दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने पेश किया था। पहले बिल में रूस से तेल या गैस खरीदने वाले किसी भी देश पर सीधे 500% का भारी-भरकम टैक्स लगाने का प्रावधान था। अब अमेरिकी सांसदों ने आपस में बातचीत के बाद इस बिल का एक नया रूप तैयार किया है, जिसमें टैक्स की इस सीमा को घटाकर अधिकतम 100% कर दिया गया है।

क्या है टैरिफ लगाने का मकसद? 

इस कानून का मकसद रूस के बड़े अधिकारियों की कड़े प्रतिबंध लगाना है। इसके साथ ही, भारी टैक्स के जरिए भारत और चीन जैसे देशों पर यह दबाव बनाना है कि वे रूस से तेल की खरीदारी में भारी कटौती करें। अमेरिकी सांसद मान रहे हैं कि अगर इन कड़े प्रतिबंधों से मॉस्को की कमाई पर चोट की जाएगी, तो उस पर बड़ा आर्थिक संकट खड़ा होगा और वह यूक्रेन के साथ युद्ध रोकने को मजबूर हो जाएगा। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस बिल के समर्थन में हैं।

बता दें कि भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के नाम उन देशों में शामिल हैं, जो रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदते हैं। वहीं, चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम रूसी नेचुरल गैस के टॉप इम्पोर्टर हैं।

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अमेरिका के क्यों बदले तेवर?

अमेरिका को यह बात समझ आ गई थी कि 500% टैक्स लगाने की धमकी देना जितना आसान है, उसे लागू करना उतना ही खतरनाक हो सकता है। अगर अमेरिका ऐसा करता, तो पूरी दुनिया के बाजार में हड़कंप मच जाता और तेल की कीमतें आसमान छूने लगतीं। इसके अलावा, भारत जैसे देश पर इतना भारी टैक्स लगाने से अमेरिका के खुद के रिश्ते खराब हो जाते। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है, जो भी पटरी से उतर सकती थी। यही वजह है कि अमेरिका को कदम पीछे खींचने पड़े और बिल को थोड़ा नरम बनाना पड़ा।

भले ही अमेरिका ने अपनी धमकी को 500% से घटाकर 100% कर दिया हो, लेकिन भारत का स्टैंड हमेशा की तरह साफ है। भारत कई बार कह चुका है कि वह किसी दबाव में आकर फैसला नहीं लेता। रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख पूरी तरह से स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। 

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Published By:
 Ruchi Mehra
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