लंच के लिए 10-15 मिनट, बीमार पड़ने पर भी छुट्टी नहीं... IIIT ग्रेजुएट ने छोड़ी 17 लाख की नौकरी, VIDEO बनाकर निकाली कॉर्पोरेट लाइफ की फ्रस्टेशन

Viral Video: इंस्टाग्राम पर एक वीडियो इन दिनों काफी वायरल हो रहा है। इसमें एक युवक आईआईआईटी दिल्ली ग्रेजुएट बता रहा है कि कैसे उसने 17 लाख पैकेज की नौकरी छोड़ दी। वीडियो में उसने कॉर्पोरेट लाइफ की फ्रस्टेशन निकाली है।

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Viral Video | Image: Instagram

Viral Video: आज के दौर में जहां युवा बेहतर सैलरी और करियर ग्रोथ के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पैसों से ज्यादा अपनी मेंटल पीस और बैलेंस लाइफस्टाइल को साथ लेकर चलते हैं। हाल ही में एक 24 साल के युवक की भी कुछ ऐसी ही कहानी है, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इसने एक वीडियो बनाकर बताया है कि कैसे उसने 17 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी। इस फैसले ने कॉर्पोरेट वर्क कल्चर को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कौन है यह युवक

यह मामला चिराग मदान का है, जो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से ग्रेजुएट हैं। वह कॉर्पोरेट बैंकिंग सेक्टर में काम कर रहे थे और उनकी सालाना सैलरी करीब 17 लाख रुपये थी। हालांकि, बढ़ते काम के दबाव और खराब वर्क लाइफ बैलेंस के कारण उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया। चिराग ने अपने वीडियो में बताया है, शुरुआत में उनकी नौकरी का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक था, लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़कर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक हो गया। इसके साथ ही 5 दिन का वर्कवीक भी बढ़कर 6 दिन का हो गया, जिससे उनके पास खुद के लिए समय लगभग खत्म हो गया।

लंच के लिए सिर्फ 15 मिनट, छुट्टी लेना भी बना चुनौती

उन्होंने बताया कि ऑफिस में लंच के लिए केवल 10 से 15 मिनट का समय मिलता था। इस दौरान भी काम का दबाव बना रहता था, जिससे सही तरीके से ब्रेक लेना मुश्किल हो जाता था। चिराग ने यह भी बताया कि बीमार होने पर भी छुट्टी लेना आसान नहीं था। कर्मचारियों को छुट्टी के लिए विस्तृत कारण बताना पड़ता था, जिसके चलते लोग जरूरत के समय भी छुट्टी लेने से बचते थे।

टारगेट का बढ़ता दबाव

कॉर्पोरेट बैंकिंग सेक्टर में काम करते हुए कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये के डील क्लोज करने का दबाव होता है। चिराग के अनुसार, उन्हें करीब 10 करोड़ रुपये तक के टारगेट दिए जाते थे। टारगेट पूरा न होने पर लगातार प्रेशर और परफॉर्मेंस रिव्यू का सामना करना पड़ता था, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता गया।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

चिराग की यह कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने उनके फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि मेंटल हेल्थ पैसों से ज्यादा जरूरी है। वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे कॉर्पोरेट दुनिया की सच्चाई बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों का सामना कई युवा रोज करते हैं। इस घटना ने कंपनियों के वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Published By :
Kirti Soni
पब्लिश्ड