'लीव पे हूं, रिप्लाई नहीं करूंगा', Gen Z कर्मचारी का बॉस को तगड़ा जवाब, वायरल चैट ने मचा दिया हंगामा, कहा- स्कूल नहीं, ऑफिस है सर
एक Gen Z कर्मचारी ने बीमार होने पर लीव ली, तो बॉस ने डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन मांग लिया। कर्मचारी ने जवाब दिया, “मैं स्कूल का स्टूडेंट नहीं हूं सर, लीव ली है।” उसका यह सीधा और तीखा रिप्लाई वायरल हो गया है।
- वायरल न्यूज़
- 3 min read

आजकल कॉर्पोरेट दुनिया में Gen Z कर्मचारियों की हिम्मत और सीधी बातचीत की मिसालें अक्सर वायरल हो रही हैं। हाल ही में एक व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर छा गया है, जिसमें एक युवा कर्मचारी ने बीमार होने पर लीव लेने की सूचना दी और बॉस की मेडिकल प्रूफ की मांग का करारा जवाब दिया।
यह चैट X (पूर्व ट्विटर) और रेडिट पर लाखों लोगों तक पहुंच चुकी है और वर्कप्लेस कल्चर पर जोरदार बहस छेड़ दी है। जिसमें एक जेन Z कर्मचारी ने अपने बॉस को ऐसा जवाब दिया कि पूरा इंटरनेट ताली बजाने लगा।
कहानी शुरू होती है सामान्य तरीके से। कर्मचारी ने अपने मैनेजर को मैसेज किया: “सर, नहीं आ पाऊंगा, बुखार बढ़ गया है।”
साधारण सी सूचना पर मैनेजर का जवाब आया: “चलो डॉक्टर के पास चलते हैं।”
कर्मचारी ने शांति से बताया कि वह पैरासिटामोल ले रहा है और आराम कर रहा है। लेकिन मैनेजर ने कंपनी के डायरेक्टर का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी बीमार कर्मचारी से डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन जरूरी है।
Advertisement
जेन Z को आ गया गुस्सा!
डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन की बात आने के बाद जेन Z अपने असली रूप में आ जाता है। यह सुनकर जेन Z कर्मचारी ने जो जवाब दिया, वह अब इंटरनेट पर वायरल है। उसने लिखा- “मैं स्कूल का छात्र नहीं हूं सर। लीव रहती है, लीव ली मैंने।” उसने आगे व्यंग्य करते हुए कहा-
डायरेक्टर साहब खुद डॉक्टर हैं तो शायद वे ही प्रिस्क्रिप्शन लिख दें। मेरे पास ना तो डॉक्टर का नोट है, ना पैरेंट्स द्वारा साइन किया लीव एप्लीकेशन। अब फोन बंद कर रहा हूं, आराम करूंगा।”
Advertisement
सोशल मीडिया का रिएक्शन
यह चैट शेयर होते ही लोगों ने इसे सराहा। कई यूजर्स ने लिखा- “भारतीय मैनेजर सोचते हैं उनके नीचे गुलाम काम करते हैं, कर्मचारी नहीं।” एक ने लिखा- “जेन Z सही कर रहा है, मेंटल हेल्थ और डिग्निटी पहले।”
हालांकि, कुछ लोग कंपनी पॉलिसी का बचाव भी कर रहे हैं, लेकिन बहुमत का मत है कि लीव कर्मचारी का अधिकार है, प्रिविलेज नहीं। लोग कह रहे हैं कि माइक्रो-मैनेजमेंट और अनावश्यक दखलंदाजी अब युवा पीढ़ी बर्दाश्त नहीं करेगी।
क्या कहता है यह ट्रेंड?
यह घटना भारतीय वर्कप्लेस में बदलते रिश्तों को दिखाती है। पुरानी पीढ़ी के बॉस अक्सर लीव को शक की नजर से देखते हैं, जबकि नई पीढ़ी वर्क-लाइफ बैलेंस, सम्मान और पारदर्शिता चाहती है। लीव पॉलिसी कानूनी अधिकार है, लेकिन कई कंपनियां इसे अभी भी मंजूरी जैसा ट्रीट करती हैं।