नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने रचा इतिहास, 50 साल बाद चांद के करीब पहुंचा मनुष्य, धरती ही नहीं चांद पर भी मिले गड्डे, हुआ बड़ा खुलासा
NASA Artemis II Mission ने 7 अप्रैल को इतिहास रच दिया है। 50 वर्ष बाद इंसान फिर से चांद के करीब पहुंचा। भारतीय समय अनुसार सुबह 12:15 (am) बजे सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के चारों ओर यात्रा की।
- टेक्नोलॉजी न्यूज
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NASA Artemis II Mission ने 7 अप्रैल को इतिहास रच दिया है। 50 वर्ष बाद इंसान फिर से चांद के करीब पहुंचा। इस मिशन पर रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कॉश और जेरेमी हैनसेन समेत कुल 4 अंतरिक्ष यात्री निकले हैं। भारतीय समय अनुसार सुबह 12:15 (am) बजे सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के चारों ओर यात्रा की। यह सफलता भविष्य के बड़े मिशन के लिए एक नींव की तरह काम करेगी। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन की इस सफलता के बाद अगली बार अंतरिक्ष यात्री को चांद की सतह पर उतारने की योजना है।
क्यों अलग है ये मिशन
चांद पर यूं तो भारत समेत दुनिया भर के कई अंतरिक्ष यात्री उतर चुके हैं। लेकिन Artemis II Mission के तहत हम पहली बार चांद के उस दूर के हिस्से को देख रहे हैं जिसे पृथ्वी से देखा ही नहीं जा सकता। इस मिशन के लिए नासा का ओरियन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में पहली बार काफी गहराई में भेजा गया। बता दें कि कभी सिर्फ अपोलो मिशन ही इस काम के लिए तैनात किये जाते थे।
चांद पर नहीं उतरे अंतरिक्ष यात्री
हालांकि नासा के आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरे नहीं बल्कि स्पेसक्राफ्ट में बैठे-बैठे चांद के चारों ओर परिक्रमा कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में लूनर फ्लायबाय कहा जाता है। ओरियन स्पेसक्राफ्ट चांद की गुरुत्वाकर्षण ताकत का प्रयोग कर एक बड़ा सा घुमाव लेगा जिसके बाद वो पृथ्वी की तरफ लौट जाएगा।
इंजन खराब हो गया तो क्या होगा
गौरतलब है कि अगर स्पेसक्राफ्ट का इंजन खराब हो जाए तो भी चांद की गुरुत्वाकर्षण ताकत अंतरिक्ष यान को धरती की ओर वापस सुरक्षित भेजने की शक्ति रखती है। इसलिए नासा का आर्टेमिस-2 मिशन बेहद सुरक्षित माना जा रहा है।
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चांद का ये हिसा क्यों है महत्वपूर्ण
चांद जिस रफ्तार से घूमता है उस रफ्तार से धरती के वो चारों ओर चक्कर भी लगाता है। इस कारण धरती से हम चांद का वो हिस्सा देख ही नहीं पाते। लेकिन अब हमें पता चल रहा है कि चांद का वो दूर का हिस्सा सपाट नहीं है बल्कि उसमें गड्डे हैं।
जब कंट्रोल रूम से संपर्क टूटा
NASA Artemis II Mission की इस यात्रा के दौरान चंद्रमा के बड़े हिस्से ने सभी रेडियो सिग्नल को ब्लॉक कर दिया था। इस कारण भारतीय समय के अनुसार आज सुबह 4:14 (am) बजे करीब 40 मिनट तक स्पेसक्राफ्ट का कंट्रोल रूम से संपर्क टूट गया था।