फ्रांस में अब नहीं खुलेगी Microsoft Windows, सरकार ने अमेरिकी कंपनियों को ठेंगा दिखाते हुए उठाया बड़ा कदम
पूरी दुनिया भर के 76 प्रतिशत कंप्यूटर माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ पर चलते हैं। लेकिन फ्रांस सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी सरकार के सभी विभागों से Windows को हटाने के निर्देश दिए हैं।
- टेक्नोलॉजी न्यूज
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Microsoft Windows: पूरी दुनिया भर के 76 प्रतिशत कंप्यूटर माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ पर चलते हैं। इससे कंप्यूटर ओएस के क्षेत्र में वर्षों से माइक्रोसॉफ्ट की बादशाहत बनी हुई थी। लेकिन अब इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। फ्रांस सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अपनी सरकार के सभी विभागों से Windows को हटाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सरकार विंडोज की जगह Linux OS को अब बढ़ावा देना चाहती है।
क्यूं उठाया ये कदम
अमेरिका-ईरान के युद्ध का असर अब अमेरिकी कंपनियों पर भी दिखने लगा है। इस समय दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर छेड़े गए युद्ध से परेशान है। इस युद्ध के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है। फ्रांस समेत दुनिया के कई देश ट्रंप के भारी टैरिफ प्लान से पहले ही परेशान थे, लेकिन अब इस युद्ध से सबको बहुत नुकसान हो रहा है। फ्रांस ने पहले ही युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया था और अब सरकार अमेरिकी कंपनियों से भी किनारा करने लगी है।
रिपोर्ट अनुसार फ्रांस का तर्क है कि Windows में अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट का नियंत्रण रहता है, जिससे उनके सरकार का डेटा सुरक्षित नहीं रहेगा। जबकी Linux एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर है, जिसमें अपने अनुसार परिवर्तन करने की सभी को सुविधा मिलती है। इसलिए सरकार विंडोज की जगह Linux को ज्यादा सुरक्षित मानते हुए उसे अपनाने जा रही है।
डिजिटल सॉवरेनिटी की राह पर फ्रांस और EU
फ्रांस सरकार का यह कदम बताता है कि सरकार अब डिजिटल संप्रभुता की राह पर चल पड़ी है। इसका ये मतलब होता है कि कोई भी देश अपनी टेक्नोलॉजी और डेटा के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर ना रहे। एक रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस के साथ पूरा यूरोपियन यूनियन (EU) भी अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
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आत्मनिर्भर बनना चाहता है EU
रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस और पूरा यूरोपियन यूनियन अमेरिकी और चीनी टेक कंपनियों पर निर्भर न रहकर अपना खुद का डिजिटल इंफ्रास्ट्रकचर चाहता है। इससे वो अपने देश के डिजिटल सिस्टम पर पूरा नियंत्रण रख सकेंगे।