Ayodhya Ram Lalla Surya Tilak: कैसे होता है रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक, भारतीय वैज्ञानिकों ने किस टेक्नोलॉजी के जरिए किया ये करिश्मा?
राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद हर वर्ष रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक होता है। लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह सूर्य तिलक कैसे होता है और इसके लिए पीछे किस तकनीक का सहारा लिया गया है।
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Ayodhya Ram Lalla Surya Tilak: राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद हर वर्ष रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक होता है। इसके लिए दोपहर 12 बजे का एक निश्चित समय भी तय किया गया है। लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह सूर्य तिलक कैसे होता है और इसके लिए पीछे किस तकनीक का सहारा लिया गया है।
राम लला पर 'सूर्य तिलक' करवाना पीएम मोदी की विशेष इच्छा थी। यही कारण था कि मंदिर के गर्भ गृह का निर्माण भी इसको ध्यान में रखते हुए किया गया था। वर्ष 2024 में पहली बार राम नवमी के अवसर पर राम लला का सूर्य तिलक हुआ था।
CBRI और IIA की टेक्नोलॉजी आई काम
सूर्य तिलक के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सहयोगी वैज्ञानिक संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स’ (IIA) और ‘सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट' (CBRI) ने मिलकर पीएम मोदी के इस सपने को पूरा किया।
कैसे होता है रामलला पर सूर्य तिलक
प्रभु श्री राम के ललाट पर सूर्य तिलक के लिए 3 दर्पणों का प्रयोग होता है। पहला दर्पण राम मंदिर के सबसे ऊंचे तीसरे फ्लोर पर लगाया गया है। सबसे पहले इस दर्पण पर दोपहर 12 बजे सूरज की किरणें पड़ती है जिन्हें 90 डिग्री में रिफ्लेक्ट करके एक पाइप के जरिए दूसरे दर्पण तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद यहां से ये किरणें फिर से रिफ्लेक्ट होकर एक पीतल के पाइप से गुजरकर तीसरे दर्पण पर जाती है।
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अब तीसरे दर्पण से भी सूरज की किरणें फिर से रिफ्लेक्ट होते हुए तेजी से 90 डिग्री पर घूमते हुए सीधे रामलला के ललाट पर कुछ मिनटों तक पड़ती है।
वैज्ञानिकों की इस पूरी प्रक्रिया में लेंस और ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी बात यह भी है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना बिजली के की गई है।