Asian Games 2026: कौन हैं ईशा सिंह? मनु भाकर जिस इवेंट में चूक गईं, उसी में भारत की इस बंदूकबाज बेटी ने जीता सिल्वर मेडल; जानिए संघर्ष की कहानी

हैदराबाद की 21 साल की स्टार बंदूकबाज ईशा सिंह ने देश का मान बढ़ाते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्तौल स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है।

Esha Singh wins individual silver in women’s 25m pistol at Asian Games 2026
Asian Games 2026: कौन हैं ईशा सिंह? मनु भाकर जिस इवेंट में चूक गईं, उसी में भारत की इस बंदूकबाज बेटी ने जीता सिल्वर मेडल; जानिए संघर्ष की कहानी | Image: X

एशियाई खेल 2026 के 9वें दिन निशानेबाजी से भारत के लिए बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर आई। जहां दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर क्वालिफिकेशन राउंड में 11वें स्थान पर रहकर मेडल की रेस से बाहर हो गईं, वहीं हैदराबाद की 21 साल की स्टार बंदूकबाज ईशा सिंह ने देश का मान बढ़ाते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्तौल स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है। इतनी ही नही, वह गोल्ड मेडल से सिर्फ थोड़े से के लिए चूक गईं।

चीन की शियाओ ने आखिरी शॉट के साथ गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहीं। ईशा ने एशियाई गेम्स के रिकॉर्ड की बराबरी भी की है। ईशा सिंह के नाम महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल के व्यक्तिगत फाइनल में विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज है। उन्होंने 26 मई 2026 को जर्मनी के म्यूनिख में 43 अंक का स्कोर कर यह विश्व रिकॉर्ड बनाया था। एशियन गेम्स के फाइनल में रजत पदक जीतने वाली ईशा के लिए यह रिकॉर्ड उनके शानदार प्रदर्शन की एक और बड़ी उपलब्धि है।

कौन है ईशा सिंह

ईशा सिंह भारत की बेहतरीन पिस्टल शूटर्स में से एक हैं और वह तेलंगाना के हैदराबाद से हैं। 1 जनवरी 2005 को जन्मी ईशा 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल इवेंट्स में हिस्सा लेती हैं और उन्होंने एशियन गेम्स, ISSF वर्ल्ड कप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीते हैं।

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ईशा सिंह के संघर्ष की कहानी

ईशा का सफर आसान नहीं था, शूटिंग में आने से पहले उन्होंने बैडमिंटन, टेनिस, स्केटिंग और गो-कार्टिंग जैसे कई खेल आजमाए, लेकिन किसी ने भी उन्हें सच में प्रेरित नहीं किया। सब कुछ तब बदल गया जब वह अपने पिता के साथ हैदराबाद के गाचीबोवली स्टेडियम में एक शूटिंग रेंज गईं। उस एक विजिट ने उनमें ऐसा जुनून जगाया जिसने उनके भविष्य को आकार दिया।

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उनके पिता सचिन सिंह, जो एक रैली ड्राइवर हैं, उन्होंने उनके आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए, उन्होंने घर पर ही पेपर-टारगेट शूटिंग रेंज बनाई ताकि ईशा रेगुलर प्रैक्टिस कर सकें। सीमित सुविधाओं के बावजूद, ईशा ने जी-तोड़ मेहनत की और बाद में पुणे में ओलंपिक मेडलिस्ट गगन नारंग की 'गन फॉर ग्लोरी एकेडमी' से जुड़ीं।

उनकी टीनएज (किशोरावस्था) के दौरान एक बहुत मुश्किल पल आया, साल 2017 में, एक कॉम्पिटिशन से पहले वह गंभीर रूप से बीमार थीं, फिर भी उन्होंने हिस्सा लिया और पोडियम तक पहुंचने में कामयाब रहीं। ईशा ने बाद में उस परफॉर्मेंस को अपनी जिन्दगी बदलने वाला पल बताया, जिसने उन्हें मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और मानसिक मजबूती दी।

सिर्फ 13 साल की उम्र में, ईशा ने मनु भाकर और हीना सिद्धू जैसे स्टार्स को हराकर सीनियर नेशनल टाइटल जीता और भारतीय शूटिंग जगत को चौंका दिया। वह इस इवेंट में सबसे कम उम्र की सीनियर नेशनल चैंपियन बनीं। उन्हें निराशा का भी सामना करना पड़ा, भारत के कोर ट्रेनिंग ग्रुप में होने के बावजूद वह टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से बहुत कम अंतर से चूक गईं। हार मानने के बजाय, उन्होंने और कड़ी मेहनत की और मजबूती से वापसी की। उन्होंने कई इंटरनेशनल मेडल जीते और पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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