WFH विश्व चैंपियनशिप में खूब लड़ीं त्रिशा-गायत्री, मेडल जीतकर रचा इतिहास, 15 साल बाद हुआ ऐसा करिश्मा

Treesa And Gayatri: बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप 2026 में भारत की ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद देश के लिए कांस्य पदक जीतने में कामयाब रही। दोनों की जोड़ी ने मेडल जीतकर 11 सालों का सूखा खत्म करने का काम किया।

BWF World Championships: Treesa-Gayatri clinch bronze
15 साल बाद रचा इतिहास: BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में त्रिशा-गायत्री ने जीता मेडल | Image: X

Treesa And Gayatri: शनिवार, 22 अगस्त को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बैडमिंटन का एक रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। भारत की स्टार बैडमिंटन जोड़ी ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने WFH विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जगह पक्की करने से चूक गई, लेकिन अपने बेहतरीन प्रदर्शन से करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया है।

BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 के विमेंस डबल्स सेमीफाइनल में लियू शेंग शू और टैन निंग की दुनिया की नंबर एक चीनी जोड़ी के खिलाफ भारतीय जोड़ी तीन गेम में हार के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीतने में कामयाब रहीं। इस मुकाबले में त्रिशा-गायत्री को 21-18, 13-21, 8-21 से हार का सामना करना पड़ा।

12-12 के स्कोर तक दोनों टीमों के बीच थी कांटे की टक्कर

मुकाबले के दौरान ऐसा लग रहा था कि भारतीय जोड़ी एक और जबरदस्त उलटफेर कर सकती है, क्योंकि उन्होंने दूसरे गेम में अपने विरोधियों के साथ तालमेल बनाए रखा और 12-11 की बढ़त बना ली। लेकिन 12-12 पर 49-शॉट की रैली, जिसे भारतीय चीनी खिलाड़ियों के जबरदस्त डिफेंस के कारण हार गए, ने फिर से रफ़्तार बदल दी। भारतीय जोड़ी ने लगातार आठ पॉइंट गंवा दिए, जिससे मैच निर्णायक गेम (decider) तक खिंच गया।

15 साल का सूखा हुआ खत्म

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में मेडल जीतने वाली त्रिशा-गायत्री भारत की केवल दूसरी महिला डबल्स जोड़ी बन गई हैं। इससे पहले साल 2011 के वर्ल्ड चैम्पियनशिप में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने देश के लिए मेडल जीता था। यानी 15 साल बाद त्रिशा-गायत्री की जोड़ी ने मेडल के इंतज़ार को खत्म कर दिया है।

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बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने क्या कहा?

गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली के कांस्य पदक जीतने पर पुलेला गोपीचंद ने कहा, "मैं लड़कियों के प्रदर्शन से बहुत खुश हूं। उन्होंने बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी। कुछ बहुत कड़े मुकाबले जीते। वे जिस तरह खेली, मैं उससे बहुत खुश हूं। इस तरह के पदक और अनुभव खिलाड़ियों और देश के लाखों लोगों प्रेरित करते हैं।"

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Published By:
 Sahitya Maurya
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