Yogini Ekadashi 2026: 9 या 10 जुलाई... कब है योगिनी एकादशी व्रत? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
Yogini Ekadashi 2026 Date: योगिनी एकादशी के दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। व्रत रखने से पहले आप जरूरी नियमों का पालन करना बिल्कुल भी न भूलें।
- धर्म और अध्यात्म
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Yogini Ekadashi 2026 Lord Vishnu Puja Vidhi: आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को 'योगिनी एकादशी' कहा जाता है। सनातन धर्म में यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए बहुत पवित्र माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत रखता है, उसे जीवन में सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।
लेकिन इस साल यानी 2026 योगिनी एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन है कि व्रत 10 जुलाई को रखा जाए या 11 जुलाई को। तो चलिए आपकी इस दुविधा को दूर करते हैं और इस व्रत से जुड़ी सभी जरूरी बातें जानते हैं।
9 या 10 जुलाई... कब रखें व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जुलाई को शाम 07 बजकर 46 मिनट के लगभग से शुरू होगी और तिथि का समापन 10 जुलाई को शाम 4 बजकर 52 मिनट के लगभग पर होगा। उदयातिथि के आधार पर योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई दिन शुक्रवार को रखा जाएगा।
शुभ मुहूर्त और पारण का समय
- व्रत की तारीख: 10 जुलाई 2026, शुक्रवार
- पारण (व्रत खोलने का समय): 11 जुलाई 2026 की सुबह 5:49 बजे से 8:39 बजे तक।
योगिनी एकादशी का महत्व
पद्मपुराण के अनुसार, यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली मानी गई है। इसके महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विधि-पूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल मिलता है। इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा हमेशा बनी रहती है।
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पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे हो सके तो पीले कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। वहां भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत, फल, प्रसाद और तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
- पूजा के समय "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें। आप विष्णु सहस्रनाम या भगवद् गीता का पाठ भी कर सकते हैं।
- पूरा दिन व्रत रखें। रात के समय भगवान का भजन-कीर्तन करना बहुत शुभ माना जाता है।
व्रत के दौरान ध्यान रखने वाले खास नियम
- इस व्रत के नियम एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से ही शुरू हो जाते हैं। इनका ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
- व्रत से एक दिन पहले रात के समय मूंग, मसूर, गेहूं, जौ और बैंगन बिल्कुल न खाएं। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए।
- एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। इसलिए, पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।
- एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है। यह नियम सिर्फ व्रत रखने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि घर के अन्य सदस्यों के लिए भी लागू होता है।
- पूरे दिन सात्विकता बनाए रखें। किसी पर गुस्सा न करें, झूठ न बोलें और किसी की बुराई या निंदा करने से बचें।
- अगले दिन यानी द्वादशी पर व्रत खोलने यानी पारण से पहले किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर दें, उसके बाद ही कुछ खाकर अपना व्रत पूरा करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।