Jyeshtha Month 2026 Kab Hai: कब से शुरू होगा ज्येष्ठ का महीना? जानें इस माह किन देवी-देवताओं के पूजा से मिलेगा मनचाहा वरदान
Jyeshtha Month 2026 Kab Hai: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का तीसरा महीना 'ज्येष्ठ' विशेष धार्मिक महत्व रखता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधिव रूप से पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो सकती है।
- धर्म और अध्यात्म
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Jyeshtha Month 2026 Kab Hai: हिन्दू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की समाप्ति के बाद ज्येष्ठ मास का प्रारंभ होता है। यह वर्ष का तीसरा और सबसे गर्म महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ का महीना बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इस बार यह सामान्य 30 दिनों के बजाय लगभग 60 दिनों का होगा। इसका मुख्य कारण इस साल लगने वाला 'अधिकमास' है। अब ऐसे में ज्येष्ठ का महीना कब से शुरू हो रहा है? इस माह में किन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
कब से शुरू होगा ज्येष्ठ का महीना?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना 2 मई 2026 से शुरू होकर 29 जून 2026 तक चलेगा। पुरुषोत्तम मास 17 मई से लेकर 15 जून तक रहेगा। इसका समापन 29 जून को होगा। चूंकि इस बार अधिकमास लग रहा है, इसलिए पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह समय साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है।
सूर्यदेव की पूजा करें
इस माह में सूर्य अपनी प्रचंड अवस्था में होते हैं। प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देने और 'ऊं घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
बजरंगबली की पूजा करें
ज्येष्ठ के मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। मान्यता है कि इसी माह में हनुमान जी की मुलाकात श्री राम से हुई थी। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन के सभी मंगल दोष और संकट दूर होते हैं।
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भगवान विष्णु की पूजा करें
अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस दौरान 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
वरुण देव की पूजा करें
भीषण गर्मी के कारण इस माह में वरुण देव की उपासना के रूप में प्याऊ लगवाना और जल दान करना सबसे उत्तम माना गया है।
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ज्येष्ठ माह में क्या करें और क्या न करें?
प्यासे को पानी पिलाना। शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ में एक समय भोजन करने वाला व्यक्ति निरोगी रहता है। इस महीने में तिल, सत्तू, पंखा और मिट्टी के घड़े का दान शुभ फलदायी होता है।
ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय सोने को निषेध माना गया है, इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। अधिकमास होने के कारण इस बीच विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। आयुर्वेद और धर्म शास्त्रों में इस महीने में बैंगन खाना वर्जित बताया गया है।