अपडेटेड 17 November 2025 at 21:07 IST

Vivah Panchami: विवाह पंचमी पर क्यों नहीं होती शादी? भगवान राम-सीता के विवाह से जुड़ी है रोचक कहानी

Vivah Panchami पर शादी क्यों नहीं की जाती? धार्मिक कारण और महत्व जानें। भगवान राम और सीता के विवाह से जुड़ी है पूरी कहानी...

 Vivah Panchami Lord Ram and Sita wedding
विवाह पंचमी पर क्यों नहीं होते विवाह? | Image: AI

Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस महीने का खास महत्व है। क्योंकि यही वह पवित्र महीना है जिसमें भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसी कारण से यह महीना धार्मिक तौर पर बड़ा महत्वपूर्ण माना जाता है।

2025 में यह तिथि 24 नवंबर को रात 09:22 से शुरू होकर 25 नवंबर को रात 10:56 पर समाप्त होगी, इसलिए उदयातिथि के अनुसार 25 नवंबर को विवाह पंचमी का उत्सव मनाया जाएगा।

इन दिन शादी क्यों नहीं होती ?

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विवाह पंचमी को मानव विवाह नहीं किया जाता। कारण यह है कि इस तिथि पर राम‑सीता का विवाह हुआ और उसके तुरंत बाद ही उन्हें कई कष्टों का सामना करना पड़ा, जैसे 14 वर्ष का वनवास, अग्निपरीक्षा और अंत में परित्याग। इन घटनाओं को देखते हुए ऐसा माना जाता है कि इस दिन नई शादी करने से नवविवाहित जोड़े को भी जीवन में कई कष्ट और बाधाएं झेलनी पड़ सकती है।

राम‑सीता ने जीवन में देखी कई कठिनाइयां

रामायण के मुताबिक, विवाह के बाद राम को राजसिंहासन छोड़कर वनवास जाना पड़ा, जबकि सीता को अपहरण, अलगाव और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं को देखते हुए कई पीढ़ियों ने इस दिन को शोक‑स्मरण के रूप में देखा है, न कि नए बंधन बनाने के लिए।

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ज्योतिषीय और पौराणिक दृष्टिकोण क्या कहत है?

ज्योतिष शास्त्र में पंचमी तिथि को विष्णु के अवतार राम से जोड़ा गया है। कुछ पंचांग विशेषज्ञों का मत है कि इस दिन के ग्रह‑योग विवाह मुहूर्त के लिये उपयुक्त नहीं होते, यहां गौरी‑मंगल जैसे शुभ योगों की जरूरत होती है, जो इस तिथि में नहीं मिलते।

लेकिन अयोध्या‑जनकपुर में किया जाता सेलिब्रेट 

वहीं, अयोध्या और नेपाल के जनकपुर में इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाया जाता है। राम‑सीता के विवाह की झांकियां सजाई जाती हैं, भजन‑कीर्तन होते हैं और हजारों भक्त इस शुभ तिथि के साक्षी बनते हैं। यहां का मुख्य उद्देश्य पूजा‑अर्चना है, न की सिर्फ मानव विवाह आयोजित करना। अविवाहित कन्याएं इस दिन राम‑सीता की पूजा कर मनचाहा वर पाने की कामना करती हैं। विवाहित महिलाएं इस दिन विशेष पूजा करके दांपत्य जीवन में प्रेम, सौभाग्य और स्थिरता की प्रार्थना करती हैं।

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इसलिए विवाह पंचमी पर नहीं होते विवाह

श्री राम जन्मभूमि मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित विजय शर्मा कहते हैं कि, 'विवाह पंचमी दिव्य विवाह का स्मरण है, इसे नई मानव शादी के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति के लिये उपयोग करना चाहिए।' क्योंकि इस दिन के ग्रह‑योग विवाह के लिये अनुकूल नहीं हैं। विवाह पंचमी 2025 को बड़े धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा, लेकिन पारम्परिक रूप से इस दिन मानव विवाह नहीं किया जाता। जोड़े जो शादी की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस दिन को पूजा‑अर्चना के लिये रखकर, शुभ मुहूर्त चुनना चाहिए, जिससे धार्मिक मान्यताओं का सम्मान और व्यक्तिगत सुख दोनों बना रहे।

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Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 17 November 2025 at 21:07 IST