अपडेटेड 16 February 2026 at 13:25 IST

Surya Grahan 2026 Sutak Kaal: सूर्य ग्रहण के सूतक काल में सोना और पाठ-पूजा करना क्यों है वर्जित? जानें इसके पीछे के छिपे रहस्य

Surya Grahan 2026 Ke Niyam: सूतक काल के नियमों का उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित रहना है। अगर आप इन पर विश्वास रखते हैं तो श्रद्धा के साथ इनका पालन करें। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

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सूर्य ग्रहण 2026 सूतक काल | Image: Freepik

सूर्य ग्रहण को भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में बेहद खास माना गया है। साल 2026 का सूर्य ग्रहण भी धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। सूर्य ग्रहण से पहले लगने वाले समय को सूतक काल कहा जाता है। इस दौरान कुछ काम करने की मनाही होती है, जैसे सोना, खाना बनाना, खाना खाना और पूजा-पाठ करना। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों कहा जाता है? तो चलिए इसके पीछे के कारण और मान्यताएं जानते हैं।

क्या होता है सूतक काल?

सूतक काल वह समय होता है, जो ग्रहण शुरू होने से 9 से 12 घंटे पहले लग जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। इसी कारण इस समय को अशुभ माना जाता है और कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

कब है साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' भी कहा जाता है। भारतीय समयानुसार इस ग्रहण का समय एक बार जान लें। 

  • ग्रहण का प्रारंभ - दोपहर 03:26 बजे
  • ग्रहण का मध्य जब सबसे पीक पर रहेगा  - शाम 05:42 बजे
  • ग्रहण का आखिरी समय - शाम 07 बजकर 57 मिनट पर 

ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 31 मिनट की रहने वाली है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा।

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सूतक काल में सोना क्यों माना जाता है वर्जित?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में सोने से व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय शरीर और मन दोनों कमजोर रहते हैं, जिससे मानसिक तनाव, डर और बेचैनी बढ़ सकती है। इसलिए इस दौरान जागकर भगवान का ध्यान करना और सकारात्मक सोच बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

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पूजा-पाठ और मंत्र जाप क्यों नहीं करना चाहिए?

सूतक काल में पूजा-पाठ और मंत्र जाप करना भी वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस समय देवताओं की ऊर्जा कमजोर हो जाती है, जिससे पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। इसलिए सलाह दी जाती है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद ही स्नान करके साफ मन और शरीर से पूजा की जाए।

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खाने-पीने पर क्यों लगती है रोक?

ग्रहण और सूतक काल के दौरान भोजन करने से बचने को कहा जाता है। मान्यता है कि इस समय भोजन दूषित हो सकता है और उसमें नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर जाती है। इसी कारण लोग खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल देते हैं, ताकि भोजन शुद्ध बना रहे।

सूतक काल में क्या करना चाहिए?

  • भगवान का स्मरण और ध्यान करें।
  • मन में सकारात्मक विचार रखें। 
  • जरूरत हो तो शांत संगीत सुनें।
  • ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान कर घर की साफ-सफाई करें।
  • इसके बाद ही पूजा-पाठ और भोजन करें।
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सूतक काल से जुड़ा वैज्ञानिक नजरिया क्या है?

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो ग्रहण के समय सूर्य की किरणों में बदलाव आता है, जिससे वातावरण में कुछ परिवर्तन होते हैं। पुराने समय में जब विज्ञान इतना विकसित नहीं था, तब लोगों को सावधान रखने के लिए ये नियम बनाए गए होंगे, ताकि वे इस समय आराम करें और बाहर निकलने से बचें।


सूतक काल के नियमों का उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित रहना है। अगर आप इन पर विश्वास रखते हैं तो श्रद्धा के साथ इनका पालन करें। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 16 February 2026 at 13:25 IST