अपडेटेड 12 March 2026 at 18:35 IST
Surya Grahan 2026: कब है साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण, भारत में होगा इसका असर? नोट कर लीजिए तारीख और समय
Surya Grahan 2026 Date: इस साल कई दिलचस्प खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं, जिनमें सूर्य ग्रहण भी शामिल है। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लग चुका है, वहीं अब लोगों की नजरें साल के दूसरे और आखिरी सूर्य ग्रहण पर टिकी हुई हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Solar Eclipse 2026 Date And Timings: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है। इस साल कई दिलचस्प खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं, जिनमें सूर्य ग्रहण भी शामिल है। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लग चुका है, वहीं अब लोगों की नजरें साल के दूसरे और आखिरी सूर्य ग्रहण पर टिकी हुई हैं। यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा और यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण यानी खग्रास होगा। तो चलिए जानते हैं इस ग्रहण की तारीख, समय, यह कहां दिखाई देगा और इसके पीछे की धार्मिक व वैज्ञानिक मान्यताएं।
12 अगस्त को लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। यह दिन सावन महीने की Amavasya (अमावस्या) तिथि का होगा।
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की टाइमिंग इस प्रकार रहेगी।
- ग्रहण की शुरुआत: रात 9:04 बजे
- ग्रहण का मध्य यानी परम ग्रास: रात 11:14 बजे
- ग्रहण की समाप्ति: 13 अगस्त की रात 1:27 बजे
यह ग्रहण खग्रास यानी पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें कुछ समय के लिए सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढक जाता है।
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क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण 2026?
भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसकी वजह यह है कि जब ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी। इसी कारण भारत में इसका धार्मिक रूप से कोई विशेष प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं माना जाता है।
किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण 2026?
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई देशों में दिखाई देगा।
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इन जगहों पर लोग इस खगोलीय घटना को साफ तौर पर देख पाएंगे। इनमें ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन के उत्तरी भाग, पुर्तगाल के कुछ क्षेत्र, यूरोप के कई देश, कनाडा, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका और रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लोग पूर्ण सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा देख सकेंगे।
सूर्य ग्रहण क्यों लगता है?
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य की रोशनी को कुछ समय के लिए ढक देता है, तब पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य ग्रहण दिखाई देता है।
पौराणिक मान्यता क्या कहती है?
हिंदू धर्मग्रंथों में सूर्य ग्रहण से जुड़ी एक रोचक कथा मिलती है। मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला, तो देवताओं और असुरों के बीच उसे पाने की होड़ मच गई।
तभी स्वर्भानु नाम के एक राक्षस ने देवता का रूप धारण कर अमृत पी लिया। लेकिन भगवान विष्णु ने उसे पहचान लिया और सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। कहते हैं कि उसी राक्षस का सिर राहु और धड़ केतु कहलाया। पौराणिक मान्यता के अनुसार यही राहु-केतु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रस लेते हैं, जिसे ग्रहण कहा जाता है।
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने वाला है, जो एक दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन दुनिया के कई देशों में लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना का नजारा देख पाएंगे।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 12 March 2026 at 18:35 IST