अपडेटेड 29 January 2026 at 20:13 IST
Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ जरूर करें इन दो गणों की पूजा, वरना पूजा रह जाएगी अधूरी
Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में शुक्र प्रदोष व्रत को बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में अगर आप भगवान शिव की पूजा कर रहे हैं तो उनके साथ दो गणों की पूजा करने का भी विधान है। आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम माना गया है। जब यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। साल 2026 में शुक्र प्रदोष का अपना एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि यह न केवल महादेव की पूजा का दिन है, बल्कि सुख-समृद्धि और वैवाहिक आनंद प्राप्ति का भी महापर्व है।
आपको बता दें, शुक्र प्रदोष व्रत 30 जनवरी को पड़ रहा है। अब ऐसे में भक्त इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा विधिवत रूप से करते हैं। लेकिन अक्सर उनकी पूजा में उनके साथ-साथ दों गणों की पूजा करने कभी विधान है। वरना इससे पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं।
प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
साल 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत के दौरान पूजा का सबसे उत्तम समय 'प्रदोष काल' यानी कि सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस दिन महादेव का अभिषेक करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता का नाश होता है और शुक्र ग्रह की मजबूती से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
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इन दो गणों की पूजा के बिना प्रदोष व्रत की पूजा है अधूरी
- शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव के दरबार में उनके गणों की अनुमति के बिना प्रवेश या उनकी कृपा प्राप्त करना कठिन है। शुक्र प्रदोष के दिन इन दो का पूजन अत्यंत आवश्यक है।
- भगवान गणेश जिन्हें प्रथम पुजनीय कहा जाता है। शिवजी के पुत्र और उनके प्रमुख गणों के स्वामी भगवान गणेश हैं। किसी भी पूजा की शुरुआत 'गणपति' के आह्वान के बिना पूर्ण नहीं होती। प्रदोष व्रत में शिवजी के अभिषेक से पहले गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना और उनका ध्यान करना अनिवार्य है। वे विघ्नहर्ता हैं, और शिव पूजा में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं।
- दूसरे नंदी महाराज जो भगवान शिव के परम भक्त हैं। वह उनके वाहन ही नहीं, बल्कि शिव के सबसे प्रिय गण और उनके द्वारपाल हैं। शिव पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति नंदी का पूजन नहीं करता, उसकी प्रार्थना महादेव तक देरी से पहुँचती है। शुक्र प्रदोष के दिन शिव पूजा के बाद नंदी के कानों में अपनी मनोकामना बोलना और उनके सम्मुख दीप जलाना सोने पे सुहागा जैसा फल देता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 29 January 2026 at 20:13 IST