अपडेटेड 21 January 2026 at 23:44 IST

Shri Hari Stotram: गुरुवार के दिन करें भगवान विष्णु के श्री हरि स्तोत्रम का पाठ, सभी बाधाएं होंगी दूर; पूरी होंगी मनोकामनाएं

Shri Hari Stotram: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो सकती है। अब ऐसे में इस दिन श्रीहरि के स्तोत्र का पाठ करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं, आइए जानते हैं।

Shri Hari Stotram
Shri Hari Stotram | Image: Freepik

Shri Hari Stotram: हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन जो भक्त सच्चे मन से श्री हरि की आराधना करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, मानसिक अशांति और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के कई तरीके हैं, लेकिन 'श्री हरि स्तोत्रम' का पाठ करना सबसे प्रभावशाली और सरल माना गया है। 

शास्त्रों के अनुसार, गुरुवार को इस स्तोत्र का पाठ करने से कुंभ और बृहस्पति ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे जातक को कार्यक्षेत्र में सफलता और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। यदि आपके बनते हुए कार्यों में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो श्री हरि स्तोत्रम का पाठ करने से लाभ हो सकता है। आइए जानते हैं।

गुरुवार के दिन करें श्रीहरि स्तोत्र का पाठ

गुरुवार के दिन श्रीहरि के स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इससे आपको शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालंशरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं।
नभोनीलकायं दुरावारमायंसुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं।।
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासंजगत्सन्निवासं शतादित्यभासं।
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रंहसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं।।
रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारंजलान्तर्विहारं धराभारहारं।
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपंध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं।।
जराजन्महीनं परानन्दपीनंसमाधानलीनं सदैवानवीनं।
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुंत्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं।।
कृताम्नायगानं खगाधीशयानंविमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं।
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलंनिरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं।।
समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशंजगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं।
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहंसुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं।।
सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठंगुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं।
सदा युद्धधीरं महावीरवीरंमहाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं।।
रमावामभागं तलानग्रनागंकृताधीनयागं गतारागरागं।
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतंगुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं।।
।।फलश्रुति।।
इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तंपठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारेः।
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकंजराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो।।

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श्रीहरि स्तोत्र का पाठ करने के नियम क्या हैं? 

  • इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • भगवान विष्णु को समर्पित होने के कारण गुरुवार को इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।
  • पाठ से पहले स्नान आदि करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करना उत्तम माना जाता है, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है।
  • एक शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। सामने भगवान विष्णु या लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पाठ शुरू करने से पहले घी का दीपक और धूप अवश्य जलाएं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 21 January 2026 at 23:44 IST