Sheetala Ashtami 2026 Vrat Katha: आज शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, बनी रहेगी कृपा; सुख-सौभाग्य का मिलेगा वरदान
Sheetala Ashtami 2026 Vrat Katha: आज शीतला अष्टमी है और इस दिन विधिवत रूप से व्रत रखने का विधान है। इस दिन को बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। अब ऐसे में इस दिन जो महिलाएं व्रत रख रही हैं, उन्हें कथा सुनने या पढ़ने का विशेष विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Sheetala Ashtami 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे हम शीतला अष्टमी या बसौड़ा के नाम से जानते हैं। साल 2026 में यह पर्व 10 मार्च, मंगलवार को यानी कि आज मनाया जा रहा है। इस दिन मां शीतला की पूजा का विधान है, जिन्हें आरोग्य और स्वच्छता की देवी माना जाता है।
मान्यता है कि शीतला माता की विधि-विधान से पूजा करने और उनकी व्रत कथा सुनने से घर में बीमारियां प्रवेश नहीं करतीं और सुख-सौभाग्य का वरदान मिलता है। आइए, इस शुभ अवसर पर जानते हैं माता शीतला की वह पौराणिक कथा, जिसका पाठ करना आज के दिन अनिवार्य माना गया है।
शीतला अष्टमी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है कि एक राजा के राज्य में शीतला माता का प्रकोप फैल गया। उस गांव में एक बुढ़िया और उसकी बहू रहती थी। दोनों ने माता शीतला का व्रत रखा, लेकिन नियमों के पालन में एक चूक हो गई। माता को ठंडा भोजन अर्पित करने के बजाय, बहू ने भूलवश गर्म खाना खा लिया और गरम भोजन ही माता को भी समर्पित कर दिया। इससे शीतला माता अत्यंत क्रोधित हो गईं और बहू के पूरे शरीर पर छाले और जलन होने लगी। वह दर्द से कराहने लगी। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वह माता से क्षमा मांगने के लिए जंगल की ओर निकल गई।
रास्ते में उसे एक वृद्ध महिला मिली, जो स्वयं भी जलन से व्याकुल थी। बहू ने ममता दिखाते हुए उस वृद्धा के सिर की जुएं साफ कीं और उसे शीतलता प्रदान की। वह वृद्धा कोई और नहीं, स्वयं माता शीतला थीं। बहू की सेवा से प्रसन्न होकर माता ने अपने असली स्वरूप के दर्शन दिए। माता ने उसे आदेश दिया कि वह बासी भोजन का भोग लगाए और ठंडे जल से स्नान करे।
जब बहू ने ऐसा किया, तो उसकी जलन शांत हो गई और उसका शरीर पहले जैसा कंचन हो गया। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता और माता को एक दिन पहले बना हुआ यानी 'बासी' भोजन ही अर्पित किया जाता है।
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शीतला अष्टमी पूजा का महत्व
शीतला माता को 'आरोग्य की देवी' माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है। सर्दियों की विदाई और गर्मियों की शुरुआत के इस संधि काल में चेचक , खसरा और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। माता की पूजा हमें स्वच्छता और शीतल खान-पान के प्रति जागरूक करती है।
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