अपडेटेड 3 February 2026 at 22:35 IST

Shani Pradosh Vrat 2026: साल का पहला शनि प्रदोष व्रत कब है? जानें भगवान शिव और शनिदेव की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Shani Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ-साथ शनिदेव की पूजा का भी विधान है। अब ऐसे में इस दिन किस मुहूर्त में पूजा करने से लाभ हो सकता है? आइए जानते हैं।

Shani Pradosh Vrat 2026
Shani Pradosh Vrat 2026 | Image: Freepik

Shani Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। जब यह व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'शनि प्रदोष' कहा जाता है। साल 2026 की शुरुआत शिव भक्तों और शनि दोष से मुक्ति चाहने वालों के लिए बेहद खास होने वाली है।

आइए जानते हैं साल 2026 के पहले शनि प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व क्या है?

साल 2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को साल का पहला शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ- 30 जनवरी 2026 को रात 10:45 बजे से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त- 31 जनवरी 2026 को रात 08:50 बजे तक
  • उदयातिथि और प्रदोष काल की पूजा के महत्व को देखते हुए, 31 जनवरी 2026 को ही यह व्रत रखा जाएगा।

प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? 

प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले के समय यानी कि प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। 

Advertisement

पूजा का समय- शाम 05:58 से रात 08:32 तक

ये भी पढ़ें - Ikka First Look: वही रुतबा, वही तेवर... जब 'रहमान डकैत' के गाल पर पड़ा सन्नी देओल का 'ढाई किलो का हाथ', Ikka का फर्स्ट लुक VIRAL

Advertisement

शनि प्रदोष व्रत का महत्व क्या है? 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो सकती है। साथ ही कुंडली में शनि के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिल सकता है।  शनिदेव भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं। इसलिए, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन रामबाण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है। पुराणों के अनुसार, शनि प्रदोष का व्रत करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति और संतान के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 3 February 2026 at 22:35 IST