Sawan Shivratri 2025: सावन शिवरात्रि आज, जानें भोलेनाथ को कौन से फल और फूल न करें अर्पित

सावन माह की शिवरात्रि को पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजन और व्रत का विधान है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से भगवान शिव का पूजन और व्रत करने से मनोकामना पूरी होती है।

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shivling upay | Image: Shutterstock

Sawan 2025: सावन शिवरात्रि आज यानि 23 जुलाई को मनाई जा रही है। सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

सावन माह की शिवरात्रि को पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजन और व्रत का विधान है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से भगवान शिव का पूजन और व्रत करने से मनोकामना पूरी होती है।

सावन शिवरात्रि के दिन व्रत का ये महत्व

सावन शिवरात्रि के दिन व्रत का खास महत्व होता है। इस दिन लोग अपने दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए व्रत रखते हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। सावन शिवरात्रि के दिन उन लोगों को इस बात का विशेष ख्याल रखना चाहिए जो सुबह शिव जी पर जल चढ़ाना चाहते हैं, उन्हें ब्रह्म मुहूर्त में पूजन करना चाहिए। लेकिन, शिवरात्रि पर निशिता मुहूर्त में जलाभिषेक करना श्रेष्ठ माना जाता है।

सावन शिवरात्रि के दिन शिव भक्त कई फल और फूल अर्पित कर भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं। लेकिन शिवलिंग पर कुछ फलों और फूलों को अर्पित करने की मनाही है। क्या आप जानते हैं? अगर नहीं, तो चलिए बताते हैं...

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शिवलिंग पर इन फलों को चढ़ाने की मनाही

  • नारियल: भगवान शिव को नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि नारियल की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक भी माना गया है। वहीं मां लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं।
  • केला: हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, शिवलिंग पर केला इसलिए नहीं चढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि केले की उत्पति भगवान शिव के रौद्र रूप और ब्राह्माण के श्राप से हुई थी।
  • अनार: मान्यता है कि अनार पूर्णरूप से शुद्ध नहीं है। इसलिए इस फल को चढ़ाने से बचना चाहिए।
  • जामुन: शास्त्रों में जामुन को शुद्ध नहीं माना गया है। यही वजह है कि शिवलिंग पर जामुन नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।

शिवलिंग पर इन फूलों को नहीं चढ़ाना चाहिए

फलों के साथ-साथ शिवलिंग पर कुछ फूलों को भी चढ़ाने की मनाही है। इसमें कटे-फटे बेल पत्र, केतकी के फूल और लाल रंग के फूल होते हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, केतकी के फूल ने भगवान शिव के बारे में झूठ बोला था, यही वजह है कि उन्हें फूल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा लाल गुलाब समेत अन्य लाल रंग के पुष्प चढ़ाना शुभ नहीं माना गया है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By :
Priyanka Yadav
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