Sawan Mangala Gauri Vrat 2026 Vrat Katha: सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर सुहागिन महिलाएं जरूर पढ़ें ये कथा, अखंड सौभाग्य का मिलेगा वरदान
हिंदू धर्म में सावन माह के मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत विशेष और फलदायी माना जाता है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है, जो दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य प्रदान करता है। आइए व्रत कथा के बारे में जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। सावन में जहां सोमवार का दिन महादेव की पूजा के लिए समर्पित है, वहीं सावन का हर मंगलवार माता पार्वती को अत्यंत प्रिय है। सावन के मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो सुहागिन महिलाएं या कुंवारी कन्याएं सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर विधि-विधान से पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य, सुयोग्य वर और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है।
मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मपाल नाम का एक बेहद समृद्ध और दयालु सेठ रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। सेठ और उसकी पत्नी दिन-रात ईश्वर से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान की कृपा से उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम धर्मदास रखा गया। हालांकि, ज्योतिषि-विद्वानों ने उस बालक की कुंडली देखकर एक दुखद भविष्यवाणी की। उन्होंने बताया कि धर्मदास की आयु अल्प होगी और 16 वर्ष की आयु में सर्पदंश (सांप के काटने) से उसकी मृत्यु हो जाएगी।
यह सुनकर धर्मपाल और उनकी पत्नी अत्यंत दुखी हुए, लेकिन उन्होंने ईश्वर पर अपना विश्वास बनाए रखा। जब धर्मदास विवाह योग्य हुआ, तो धर्मपाल ने उसका विवाह एक ऐसी कन्या से कराया, जिसकी माता बचपन से ही सावन मंगला गौरी व्रत का पूरी निष्ठा और विधि-विधान से पालन करती आ रही थीं।
माता पार्वती का मिला वरदान
कथा के अनुसार, माता मंगला गौरी के उस व्रत के प्रभाव से उस कन्या की माता को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी पुत्री कभी विधवा नहीं हो सकती है। जब धर्मदास की आयु 16 वर्ष हुई, तो नियति के अनुसार एक जहरीला नाग उसे डसने के लिए आया। लेकिन मंगला गौरी व्रत के प्रताप और कन्या के माता-पिता के पुण्य कर्मों के कारण, वह सर्प धर्मदास को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका और उल्टे एक विषहीन जीव में बदल गया। इस तरह माता मंगला गौरी की कृपा से धर्मदास को नवजीवन प्राप्त हुआ और वह अल्पायु के संकट से मुक्त हो गया।
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मंगला गौरी व्रत कथा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मंगला गौरी व्रत रखने से मृत्यु के भय और पति पर आने वाले हर संकट को दूर कर सकता है।
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