अपडेटेड 3 January 2026 at 23:38 IST
Sakat Chauth 2026 Lord Ganesha Vrat Katha: सकट चौथ के दिन जरूर पढ़ें भगवान गणेश से जुड़ी ये 2 कथाएं, वरना व्रत रह जाएगा अधूरा
Lord Ganesha Vrat Katha: सकट चौथ व्रत के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ इन दोनों कथाओं का पाठ करना बहुत जरूरी माना जाता है। कहा जाता है कि कथा सुनने से व्रत पूर्ण होता है और गणपति बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।Lord Ganesha Vrat Katha
- धर्म और अध्यात्म
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Sakat Chauth 2026 Vrat Katha In Hindi: सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। यह व्रत खासतौर पर संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान गणपति जल्दी प्रसन्न होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर सकट चौथ के दिन कथाएं न पढ़ी जाएं, तो व्रत का फल अधूरा माना जाता है। सकट चौथ पर मुख्य रूप से दो कथाएं पढ़ने की परंपरा है। तो चलिए इन दोनों कथाओं को जानते हैं।
कथा 1: गणेश जी और बुढ़िया माई की कथा
एक समय की बात है, एक बुढ़िया मां थी जो बहुत गरीब और अंधी थीं। उनके एक बेटा और बहू थे। वह रोज पूरे मन से भगवान गणेश की पूजा किया करती थीं। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन भगवान गणेश उनके सामने प्रकट हुए।
गणेश जी बोले, “बुढ़िया मां, मैं तुम्हारी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूं। तुम जो चाहो, मांग लो।”
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बुढ़िया मां बोलीं, “प्रभु, मुझे तो मांगना नहीं आता। क्या मांगूं, कैसे मांगूं?”
गणेश जी ने कहा,“अपने बेटे-बहू से पूछ लो।”
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बेटे ने कहा-धन मांग लो। बहू ने कहा-नाती मांग लो।
बुढ़िया मां ने सोचा कि दोनों अपने-अपने स्वार्थ की बात कर रहे हैं। तब उन्होंने पड़ोसिनों से सलाह ली। पड़ोसिनों ने कहा, “बुढ़िया, तू आंखों की रोशनी मांग ले, ताकि बाकी जीवन आराम से कटे।”
तब बुढ़िया मां ने गणेश जी से कहा- “हे प्रभु! अगर आप प्रसन्न हैं तो मुझे निरोगी काया, आंखों की रोशनी, धन, संतान, पूरे परिवार का सुख और अंत में मोक्ष प्रदान करें।”
यह सुनकर गणेश जी मुस्कुराए और बोले, “बुढ़िया मां, तुमने तो मुझे ठग लिया। लेकिन मैंने वचन दिया है, इसलिए तुम्हें सब कुछ मिलेगा।”
इतना कहकर गणेश जी अंतर्धान हो गए। कुछ समय बाद बुढ़िया मां को उनका सब कुछ प्राप्त हुआ। इस कथा से यह सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति से भगवान सब कुछ प्रदान करते हैं।
कथा 2: गणेश जी और कार्तिकेय की कथा
यह कथा भगवान गणेश और उनके भाई भगवान कार्तिकेय से जुड़ी है। एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों से कहा, “जो पृथ्वी की तीन बार परिक्रमा करके पहले आएगा, वही विजेता होगा।”
कार्तिकेय जी तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। लेकिन गणेश जी ने पृथ्वी की परिक्रमा करने के बजाय माता पार्वती और भगवान शिव की तीन बार परिक्रमा कर ली।
जब कार्तिकेय जी लौटे तो गणेश जी पहले से ही वहां मौजूद थे। गणेश जी ने कहा, “मेरे लिए माता-पिता ही पूरी सृष्टि हैं। उनसे बड़ा कुछ भी नहीं।”
गणेश जी की बुद्धि और समझ से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। उन्होंने कहा, “जो भी व्यक्ति किसी भी शुभ काम से पहले गणेश जी की पूजा करेगा, उसके सारे काम सफल होंगे।”
साथ ही यह भी वरदान दिया गया कि सकट चौथ के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से सुख, समृद्धि, संतान और धन की प्राप्ति होती है और सभी संकट दूर होते हैं।
सकट चौथ का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ इन दोनों कथाओं का पाठ करना बहुत जरूरी माना जाता है। कहा जाता है कि कथा सुनने से व्रत पूर्ण होता है और गणपति बप्पा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 3 January 2026 at 23:38 IST