Purnima Grih Pravesh Niyam: पूर्णिमा के दिन करने जा रहे हैं गृह प्रवेश, इन नियमों का जरूर करें पालन
Purnima Grih Pravesh Niyam: हिंदू धर्म में पूर्णिमा की तिथि को बेहद शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यदि आप इस पावन दिन अपने नए घर में कदम रखने जा रहे हैं, तो शास्त्रों में वर्णित कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है ताकि घर में सुख-शांति और लक्ष्मी का वास बना रहे।
- धर्म और अध्यात्म
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Purnima Grih Pravesh Niyam: हिंदू धर्म में 'गृह प्रवेश' केवल एक मकान में शिफ्ट होना नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि को बहुत ही शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर माना गया है। यदि आप इस पावन दिन अपने नए आशियाने में कदम रखने जा रहे हैं, तो कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि गृह प्रवेश के दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी है?
गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना बेहद जरूरी
पूर्णिमा बेहद पवित्र माना जाता है,लेकिन गृह प्रवेश से पहले 'नक्षत्र' और 'लग्न' की गणना जरूर करवा लेनी चाहिए। आमतौर पर गृह प्रवेश के लिए स्थिर लग्न को श्रेष्ठ माना जाता है ताकि परिवार में स्थिरता बनी रहे।
घर की शुद्धिकरण का जरूर रखें ध्यान
मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं। द्वार पर स्वास्तिक और रंगोली बनाना सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। प्रवेश से पूर्व पूरे घर में गंगाजल छिड़कें ताकि निर्माण के दौरान रही अशुद्धियां दूर हो सकें।
गृह प्रवेश में कलश स्थापना का महत्व
गृह प्रवेश के समय मंगल कलश का विशेष महत्व है। एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, दूर्वा और अक्षत डालें। कलश के मुख पर नारियल रखें और इसे लेकर ही घर के मुखिया को सबसे पहले अंदर प्रवेश करना चाहिए।
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गृह प्रवेश में वास्तु पूजन है जरूरी
बिना वास्तु शांति और गणेश पूजन के गृह प्रवेश अधूरा माना जाता है। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा और हवन कराने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। हवन का धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और वास्तु दोषों का निवारण करता है।
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गृह प्रवेश के दौरान रसोई का श्रीगणेश
नए घर की रसोई में सबसे पहले दूध उबालना शुभ माना जाता है। दूध का उबलकर गिरना समृद्धि का प्रतीक है। इसके बाद उसी दूध से खीर या कोई मीठा पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाएं और सबसे पहले कन्याओं या ब्राह्मणों को खिलाएं।