अपडेटेड 16 January 2026 at 13:19 IST

Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam: मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के नियम और विधि क्या हैं? व्रत से पहले जान लें

Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन कई लोग मौन व्रत रखते हैं, अगर आप भी मौन व्रत रखना चाहते हैं तो हम आपको बताएंगे कि सही विधि और नियम क्या है?

Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam
Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam | Image: Freepik

Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam:  हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास में आने वाली मौनी अमावस्या को सबसे फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का पावन पर्व 18 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान का अनंत फल मिलता है, लेकिन इस दिन की सबसे बड़ा महत्व मौन व्रत होता है। 

शास्त्रों के अनुसार, 'मुनि' शब्द से ही 'मौनी' की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस दिन मौन रहकर साधना करने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है। यदि आप भी इस वर्ष मौनी अमावस्या का व्रत रखने का विचार कर रहे हैं, तो इसके नियम और विधि को समझना बेहद जरूरी है। आइए इस लेख में विस्तार से मौन व्रत के सही नियम और विधि के बारे में जानते हैं।

मौनी अमावस्या व्रत की विधि क्या है? 

  • मौनी अमावस्या के दिन व्रत और पूजा ब्रह्म मुहूर्त से ही शुरू हो जाती है। 
  • इस दिन सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी में स्नान करना सर्वोत्तम है। यदि संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। संकल्प लेते समय मन ही मन भगवान विष्णु और शिव का ध्यान करें और प्रण लें कि आप पूरे दिन या कुछ घंटों के लिए वाणी पर नियंत्रण रखेंगे।
  • स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दें। चूंकि यह अमावस्या पितरों को समर्पित है, इसलिए इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म करना बेहद शुभ माना जाता है।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें।

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मौन व्रत रखने के नियम क्या हैं? 

  • मौन व्रत केवल चुप रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन के अनुशासन का पर्व है। 
  • व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अपशब्द, झूठ या क्रोध से बचें। 
  • मौन रहने का अर्थ खाली बैठना नहीं है। मुख बंद रहे लेकिन मन में 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का निरंतर जाप करते रहें। इस बात का ध्यान रखें कि मन में जाप करें। 
  • इस दिन पूर्ण उपवास रखना श्रेष्ठ है। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो एक समय फलाहार लिया जा सकता है। 
  • मौनी अमावस्या के दिन शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 16 January 2026 at 13:19 IST