अपडेटेड 18 January 2026 at 07:33 IST
Mauni Amavasya 2026 Aarti: माघ मेले में आज मौनी अमावस्या का बड़ा स्नान, शाम को ये आरती करने से मिलेगा भगवान शिव और पितरों का आशीर्वाद
Mauni Amavasya Aarti: मान्यता है कि मौनी अमावस्या की शाम सच्चे मन से आरती और पूजा विधि संपन्न करने से पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Mauni Amavasya Aarti Lyrics In Hindi: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म की एक बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मौन रहकर आत्मचिंतन, साधना और भक्ति करना होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
साल 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी यानि आज है। इसी कारण इस दिन स्नान का विशेष महत्व है। माघ मेले में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मौनी अमावस्या का महत्व
मौनी अमावस्या को माघ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने से मन शांत रहता है, मानसिक शक्ति बढ़ती है और एकाग्रता में सुधार होता है। साथ ही इस दिन दान-पुण्य, पितरों का तर्पण और आरती करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
शाम को आरती करने का विशेष फल
माना जाता है कि मौनी अमावस्या की शाम को भगवान शिव, मां गंगा और पितरों की आरती करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इससे पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
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मौनी अमावस्या की प्रमुख आरतियां
भगवान शिव जी की आरती (Shiv Ji Aarti Lyrics)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव...॥
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श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
ॐ जय शिव...।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
श्री गंगा मैया आरती (Maa Ganga Aarti Lyrics)
नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं, भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥
हर हर गंगे, जय माँ गंगे, हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
एक ही बार जो तेरी, शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता । दास वही सहज में, मुक्ति को पाता ॥ ॥ ॐ जय गंगे माता..॥
ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
पितरों की आरती (Pitru Aarti Lyrics)
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूं थारी।
शरण पड़यो हूं थारी बाबा, शरण पड्यो हूं थारी ॥
आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूं कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे ॥
जय जय पितरजी महाराज
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी ॥
जय जय पितरजी महाराज।
देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई ॥
जय जय पितरजी महाराज।
भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार ॥
जय जय पितरजी महाराज।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 18 January 2026 at 07:33 IST