अपडेटेड 15 December 2025 at 16:56 IST
Mangalwaar Stotra 2025: मंगलवार के दिन जरूर करें हनुमान वडवानल स्तोत्र का जाप, मिलेगी मानसिक शांति और सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी
Mangalwaar Stotra 2025: मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष विधान है। अब ऐसे में इस दिन एक ऐसा स्तोत्र है, जिसका पाठ करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Mangalwaar Stotra 2025: ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन पवनपुत्र हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और सभी प्रकार को रोगदोष से भी छुटकारा मिल सकता है। हनुमान जी मंगल ग्रह के भी कारक के माने जाते हैं। इसलिए अगर आपकी कुंडली में मंगलदोष है तो इस दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को मंगलदोष के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिल सकता है।
अब ऐसे में मंगलवार के दिन हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ करने का विशेष विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से स्तोत्र का पाठ करने का महत्व और नियम के बारे में जानते हैं।
मंगलवार के दिन करें हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ
मंगलवार के दिन आप हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ जरूर करें। इससे आपको शुभ परिणाम मिल सकते हैं।
आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं
श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये।
ध्यान
मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम
सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय
वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र
उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र
अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार
सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद
सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःख निवारणाय
ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन
भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर
चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर,
माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस
भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां
ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं
ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां
शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर
आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय
शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय
प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन
परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु
शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय
नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान्
यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा।
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते
राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र
पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय
नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा।
।। इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं ।।
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हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ करने का महत्व
हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर से छुटकारा मिल सकता है। इतना ही नहीं, इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को रोगों से छुटकारा मिल सकता है और शत्रु भी दूर होते हैं। अगर किसी चीज के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं तो इस स्तोत्र का पाठ करने से आपको उत्तम परिणाम मिल सकते हैं।
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Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 15 December 2025 at 16:56 IST