अपडेटेड 4 February 2026 at 22:43 IST

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को कौन से फूल चढ़ाएं और कौन से नहीं, पूजा से पहले जान लें

Mahashivratri 2026: साल 2026 में महाशिवरात्रि का महापर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। शिव पूजा में फूलों का विशेष महत्व है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत फूल चढ़ाने से आपकी पूजा अधूरी रह सकती है? आइए इस लेख में जानते हैं।

 Mahashivratri 2026
Mahashivratri 2026 | Image: Freepik

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक है। साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह वह पावन दिन है जब भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण करते हैं। शिव पूजा में बेलपत्र और जल का जितना महत्व है, उतना ही महत्व फूलों का भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोलेनाथ को हर फूल अर्पित नहीं किया जा सकता है?

शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष फूल महादेव को अत्यंत प्रिय हैं, जबकि कुछ फूलों का अर्पण वर्जित माना गया है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की पूजा से पहले जानते हैं कि महादेव को कौन से फूल चढ़ाएं?  

महादेव को चढ़ाएं आक के फूल 

महादेव को सफेद आक के फूल सबसे अधिक प्रिय हैं। मान्यता है कि इन्हें चढ़ाने से लंबी आयु और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

महादेव को चढ़ाएं धतूरे के फूल 

शिव पुराण के अनुसार, धतूरा भगवान शिव को अति प्रिय है। इसके फूल चढ़ाने से संतान सुख और शत्रुओं पर विजय मिलती है।

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महादेव को चढ़ाएं कनेर के फूल

शिव पूजा में पीले और सफेद कनेर के फूलों का विशेष महत्व है। इससे घर में सुख-शांति और ऐश्वर्य आता है।

महादेव को चढ़ाएं शमी के फूल 

जिस प्रकार शिवजी को शमी के पत्ते प्रिय हैं, वैसे ही इसके फूल भी उन्हें बहुत पसंद हैं। इससे शनि दोष से भी मुक्ति मिलती है।

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महादेव को चढ़ाएं पारिजात का फूल 

पारिजात के सफेद और नारंगी डंडी वाले फूल महादेव को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।

महाशिवरात्रि के दिन महादेव को न चढ़ाएं ये फूल

  • पौराणिक कथा के अनुसार, केतकी ने ब्रह्मा जी के असत्य में साथ दिया था, जिससे क्रोधित होकर शिवजी ने इसे अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था। 
  • केतकी के फूल शिव को भूलकर भी न चढ़ाएं। 
  • गुड़हल के फूल भी भगवान शिव को न चढ़ाएं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 4 February 2026 at 22:43 IST