अपडेटेड 6 February 2026 at 18:26 IST

MahaShivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की परिक्रमा कब और कैसे लगाएं? जान लें सही नियम

MahaShivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 के अवसर पर शिवलिंग की पूजा और परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस साल महाशिवरात्रि का महापर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। यदि आप भी महादेव की कृपा पाना चाहते हैं, तो शिवलिंग की परिक्रमा से जुड़े इन शास्त्रों के नियमों को जानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं।

MahaShivratri 2026
MahaShivratri 2026 | Image: Facebook

MahaShivratri 2026: हिंदू पंचांग के हिसाब से फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह वह पावन रात्रि है जब शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। इस दिन भक्त शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए मंदिर में परिक्रमा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग की परिक्रमा अन्य देवी-देवताओं की परिक्रमा से बिल्कुल भिन्न होती है? 

आइए जानते हैं कि शिवलिंग की परिक्रमा लगाने के नियम के बारे में जानते हैं।

महाशिवरात्रि की शुभ तिथि और मुहूर्त क्या है? 

साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रविवार के दिन मनाई जाएगी। 
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ- 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से लेकर 
चतुर्दशी तिथि का समापन - 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 34 मिनट तक। 
पूजा के लिए निशिता काल का शुभ मुहूर्त - 16 फरवरी की रात 12:09 से लेकर देर रात 01 बजकर 01 मिनट तक

शिवलिंग की परिक्रमा का नियम क्या है? 

शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है।शिवलिंग के चारों ओर घूमने के बजाय केवल आधी परिक्रमा करने का विधान है।
शिवलिंग से जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसे 'सोमसूत्र' या 'निर्मली' कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सोमसूत्र में शिव और शक्ति की प्रचंड ऊर्जा प्रवाहित होती है। इसे लांघने से व्यक्ति के शरीर और ऊर्जा चक्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 
शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बाईं ओर से शुरू करनी चाहिए। जलाधारी  तक जाकर उसे बिना लांघे वापस मुड़ जाना चाहिए और दूसरी तरफ से फिर जलाधारी तक आना चाहिए। इसे 'चंद्राकार' या 'अर्ध-परिक्रमा' कहा जाता है।

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शिवलिंग की परिक्रमा कब और कैसे करें? 

हमेशा जलाधारी के बाईं ओर से शुरू करें।
अभिषेक और पूजा संपन्न करने के बाद ही परिक्रमा करें। महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की पूजा के बाद परिक्रमा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
परिक्रमा करते समय मन ही मन 'ऊं नमः शिवाय' का जाप करें। ध्यान रहे कि परिक्रमा के दौरान आपके पैर सोमसूत्र को स्पर्श न करें।
महाशिवरात्रि के दिन शिव पुराण के अनुसार 1, 3, 5 या 7 बार आधी परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। विषम संख्या में की गई परिक्रमा आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 6 February 2026 at 18:26 IST