अपडेटेड 12 February 2026 at 17:08 IST
Mahashivratri 2026 Parthiv Shivlinga: महाशिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग की पूजा कैसे करें? जानें नियम
Mahashivratri 2026 Parthiv Shivlinga: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के दिन पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। अब ऐसे में इस दिन पार्थिव शिवलिंग की पूजा किस विधि से करें और नियम क्या है? आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Mahashivratri 2026 Parthiv Shivlinga: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और रात भर जागरण कर महादेव की भक्ति में लीन रहते हैं। शिव पूजा के कई प्रकारों में 'पार्थिव शिवलिंग' यानी कि पीली मिट्टी से शिवलिंग बनाने का विधान है।
आपको बता दें, शास्त्रों में पीली मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से तुरंत फल देने वाला माना जाता है। अब ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन पार्थिव शिवलिंग की पूजा किस विधि से करें और नियम क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा के लिए सामग्री
- स्थापना- चौकी पर अक्षत रखकर शिवलिंग को स्थापित करें।
- अभिषेक- सबसे पहले जल, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। अंत में शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।
- श्रृंगार- शिवजी को चंदन, भस्म, त्रिपुंड, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।
- प्रिय चीजें - भगवान को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाएं।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा किस विधि से करें?
- किसी पवित्र नदी, तालाब या बेल के पेड़ की जड़ की मिट्टी लें। यदि यह संभव न हो, तो साफ स्थान या गमले की मिट्टी का प्रयोग करें।
- मिट्टी को छानकर उसमें गंगाजल, गाय का दूध, घी और गाय का गोबर मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें।
- एक साफ लकड़ी की चौकी या तांबे के पात्र पर बेलपत्र रखें और उस पर शिवलिंग का निर्माण करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग की ऊंचाई 12 अंगुल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- शिवलिंग बनाते समय और पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा के नियम क्या है?
- पार्थिव शिवलिंग को बनाकर उसकी पूजा उसी दिन या अगले दिन सूर्योदय से पहले करनी चाहिए। पूजा के बाद इसे किसी नदी, तालाब या गमले में विसर्जित कर देना चाहिए। इसे घर में स्थायी रूप से नहीं रखा जाता है।
- शिवलिंग बनाने से पहले स्वयं स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाता, इसे विसर्जित कर देना चाहिए।
- पूजा के दौरान निरंतर 'ऊं नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का मानसिक जप करते रहें।
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पार्थिव शिवलिंग की पूजा का महत्व
शिवपुराण के अनुसार, कलयुग में मिट्टी के शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। पार्थिव पूजा से धन, धान्य, सुख-सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि जो भक्त महाशिवरात्रि पर मिट्टी के शिवलिंग बनाकर उनका अभिषेक करते हैं, उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है और उनके सभी मानसिक व शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 12 February 2026 at 17:08 IST