कथा: मरकर दोबारा कैसे जिंदा हुए अर्जुन? महाभारत युद्ध के बाद हुआ कुछ ऐसा
How was Arjuna's son killed? महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन को किसने मारा? यहां दी गई कथा के माध्यम से जानते हैं इसके बारे में...
- धर्म और अध्यात्म
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महाभारत युद्ध में अर्जुन का सारथी बन श्री कृष्ण ने न केवल उनकी मदद की बल्कि उन्हें जीवन और मरण के सत्य के बारे में भी बताया। वहीं अर्जुन किसी के सामने परास्त ना हो जाएं, इसके लिए कई छल भी किए गए। लेकिन युद्ध के बाद अर्जुन की मृत्यु हुईं और भगवान श्री कृष्ण ने उसे फिर से जीवित भी कर दिया। जी हां, यह कथा बेहद विचित्र और अनसुनी भी है। ऐसे में इस कथा के बारे में पता होना जरूरी है।
आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि अर्जुन की मृत्यु किसके हाथों हुई और भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें क्यों जीवित किया। पढ़ते हैं आगे…
महाभारत युद्ध के बाद अर्जुन को किसने मारा? (Who killed Arjun after Mahabharat yudh?)
पुरानी कथा के अनुसार, जब महाभारत युद्ध खत्म हो गया तो पांडवों को श्री कृष्ण और वेदव्यास जी ने अश्वमेध यज्ञ के लिए कहा। ऐसे में अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को पूरे भारत में भ्रमण के लिए छोड़ दिया और उसकी रक्षा का दायित्व अर्जुन को दे दिया। ऐसे में अर्जुन घोड़े के पीछे वहां वहां जाते जहां जहां वो जाता। इस तरह घोड़ा पूरे भारत में भ्रमण करने लगा।
इसी बीच वह मणिपुर पहुंचा और उसके पीछे अर्जुन भी पहुंचे। मणिपुर में अर्जुन की पत्नी चित्रांगना और उनके पुत्र बब्रुवाहन रहता था। वह मणिपुर का राजा था। ऐसे में जब उसे पता चला कि उसके पिता मणिपुर आए हैं तो उसने स्वागत करने के बारे में सोची। भगवान ने अनजाने में घोड़े को अपने पास रोक लिया और उसकी सेवा करने के बारे में सोचा।
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अर्जुन को जब इस बात का पता चला तो उन्हें मजबूरन अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को रोकने के कारण बब्रुवाहन को युद्ध के लिए ललकारना पड़ा। चूंकि बब्रुवाहन भी एक योद्धा थे, ऐसे में उन्हें चुनौती स्वीकार करनी पड़ी और युद्ध में अपनी शक्तियों से अपने पिता अर्जुन को न केवल परास्त किया बल्कि उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
जब चित्रांगना को इस बात का पता चला तो उन्हें बेहद दुख हुआ। उन्होंने अपने पुत्र के साथ श्री कृष्ण का आवाहन कर उन्हें उस जगह बुलाया जहां अर्जुन थे और उनसे उन्हें पुनर्जीवित करने की प्रार्थना की। श्री कृष्ण को पहले से ज्ञात था। ऐसे में उन्होंने अर्जुन को अपनी दिव्य शक्तियों से पुण्य जीवित कर दिया। इस प्रकार अर्जुन जीवित हो गए।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।