अपडेटेड 2 March 2026 at 10:52 IST

Lunar Eclipse 2026: 2:16 AM पर साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण, लाल होगा चांद ; जानें कब और कहां-कहां दिखेगा

Lunar Eclipse 2026: साल 2026 की पहली खगोलीय घटना के रूप में 3 मार्च को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण दोपहर 2:16 बजे शुरू होगा और शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। इस दौरान जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाएगी, तब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा।

Lunar Eclipse 2026
Lunar Eclipse 2026 | Image: Freepik

Lunar Eclipse 2026: साल 2026 खगोलीय घटना लेकर आ रहा है। साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगने जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाएगा, जिससे वह गहरे लाल या तांबे के रंग का दिखाई देगा। इसे 'ब्लड मून' भी कहा जाता है। अब ऐसे में कई लोग कंफ्यूजन में हैं कि साल का पहला चंद्र ग्रहण कब और कितने बजे से लगेगा? साथ ही सूतक काल कब से लगेगा और ये ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा?आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

कब और कितने बजे लगेगा ग्रहण?

भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 3 मार्च 2026 की दोपहर को शुरू होगा, लेकिन इसका पूर्ण रूप शाम के समय दिखाई देगा।
ग्रहण की शुरुआत- दोपहर 2:16 बजे 
पूर्ण चंद्र ग्रहण की शुरुआत- शाम 4:34 बजे 
ग्रहण का चरम - शाम 5:04 बजे 
पूर्ण चंद्र ग्रहण की समाप्ति- शाम 5:33 बजे 
ग्रहण की समाप्ति- शाम 6:48 बजे

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?

यह दुर्लभ खगोलीय घटना मुख्य रूप से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी। भारत में दृश्यता अलग-अलग स्थानों पर भिन्न होगी। 
पूर्वोत्तर भारत- असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और बंगाल जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में ग्रहण का बेहतर नजारा दिखेगा क्योंकि वहां चंद्रमा पहले उदित होता है।
वहीं दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में लोग ग्रहण का अंतिम हिस्सा देख पाएंगे, जो चंद्रोदय के तुरंत बाद शाम को दिखाई देगा।

साल का पहला चंद्र ग्रहण होगा लाल

पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। पृथ्वी सूर्य की किरणों को सीधे चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है। हालांकि, सूर्य का कुछ प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है। पृथ्वी के वायुमंडल में धूल और बादलों के कारण नीली रोशनी बिखर जाती है, जबकि लाल रोशनी वायुमंडल के माध्यम से मुड़ जाती है और चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा हमें लाल रंग का दिखाई देता है।

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सूतक काल में बरतें ये सावधानी 

हिंदू धर्म में ग्रहण का विशेष महत्व है। इस ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सुबह 6:20 बजे ही लग जाएगा। सूतक काल के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को छोड़कर, आम तौर पर सूतक काल के दौरान भोजन करने या बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। 

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 2 March 2026 at 10:52 IST