अपडेटेड 28 January 2026 at 16:15 IST

Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026: इस कथा के बिना अधूरा है जया एकादशी का व्रत, जरूर पढ़ें

Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में जया एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन जो जातक व्रत रख रहे हैं, उन्हें कथा अवश्य सुननी चाहिए। आइए इस लेख में व्रत कथा के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026
Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026 | Image: Freepik

Jaya Ekadashi Vrat Katha 2026: सनातन धर्म में जया एकादशी को बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं जया एकादशी का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। साथ ही इस दिन  रवि योग भी बन रहा है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकदाशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है और शुभ परिणाम मिल सकते हैं। इतना ही नहीं, जया एकादशी के दिन जो जातक व्रत रख रहे हैं, वह व्रत कथा जरूर सुनें ये फिर पढ़ें। इससे उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। अब ऐसे में इस दिन जो जातक व्रत रख रहे हैं। वह ये लेख जरूर पढ़ें।

जया एकादशी के दिन जरूर पढ़ें व्रत कथा 

पद्म पुराण के अनुसार, एक समय की बात है जब स्वर्ग में इंद्र की सभा लगी हुई थी। देवराज इंद्र अपनी सभा में गंधर्वों के गान और अप्सराओं के नृत्य का आनंद ले रहे थे। उस सभा में माल्यवान नामक एक गंधर्व और पुष्पवती नामक एक सुंदर अप्सरा भी मौजूद थे। नृत्य के दौरान दोनों एक-दूसरे को देखकर मोहित हो गए और कामवश अपनी मर्यादा भूल बैठे। प्रेम में डूबे होने के कारण वे अपनी लय और ताल से भटक गए, जिससे संगीत का प्रवाह टूट गया। 

यह देखकर देवराज इंद्र अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने इसे देवताओं का अपमान समझा और क्रोध में आकर दोनों को श्राप दे दिया कि तुम दोनों ने स्वर्ग की मर्यादा भंग की है, इसलिए तुम स्वर्ग से गिरकर होकर मृत्युलोक यानी कि  
पृथ्वी में निवास करोगे और पिशाच योनि को प्राप्त होगे।

इंद्र के श्राप के कारण माल्यवान और पुष्पवती हिमालय पर्वत पर पिशाच के रूप में रहने लगे। वहां उनका जीवन अत्यंत कष्टकारी था। न उन्हें ठीक से भोजन मिलता था और न ही नींद। कड़ाके की ठंड और भूख-प्यास से वे व्याकुल रहते थे। एक बार माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी आई। उस दिन वे दोनों बहुत दुखी थे और अनजाने में ही उन्होंने पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया। भूख और ठंड के कारण वे रात भर सो भी नहीं पाए। इस प्रकार अनजाने में ही उनसे जया एकादशी का व्रत हो गया। 

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अगले दिन सुबह होते ही भगवान विष्णु की कृपा से उन दोनों की पिशाच योनि से मुक्ति हो गई। वे फिर से अपने सुंदर दिव्य रूप में आ गए और स्वर्ग लोक लौट गए। जब देवराज इंद्र ने उन्हें वापस देखा, तो वे चकित रह गए। माल्यवान ने बताया कि यह भगवान विष्णु की जया एकादशी का प्रभाव है।

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जया एकादशी के दिन व्रत रखने का महत्व 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जो जातक इस दिन व्रत रखता है, उसे जीवन में हमेशा सफलता मिलती है और जीवन में चल रही सभी समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है। 

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 28 January 2026 at 16:15 IST