अपडेटेड 23 February 2026 at 12:30 IST
Holi 2026: होलिका दहन से पहले 8 दिन तक भूलकर भी न करें ये काम, माना जाता है अशुभ
Holashtak 2026 Rules: होलाष्टक के ये आठ दिन आत्मसंयम, साधना और सावधानी के लिए होते हैं। इस दौरान संयमित जीवनशैली अपनाने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है।
- धर्म और अध्यात्म
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Holi 2026 Rules: होली से पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। इस दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से हो रही है और इसका समापन 3 मार्च को होगा। इन दिनों होली की तैयारियां तो होती हैं, लेकिन धार्मिक रूप से यह समय संयम और सावधानी रखने का माना जाता है।
होलाष्टक का महत्व क्या है?
धार्मिक कथाओं के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था। इसके अलावा, मान्यता है कि इसी काल में असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक कष्ट दिए थे। लेकिन प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और विश्वास ने हर कठिनाई को पार कर लिया। इसलिए इन आठ दिनों को तप, साधना और आत्मसंयम का समय माना जाता है।
होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?
- शादी-विवाह और शुभ कार्य: इस दौरान शादी, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। माना जाता है कि इससे कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
- नया काम या निवेश: नया बिजनेस शुरू करना, घर खरीदना या बड़ा निवेश करने से बचें। इस समय किया गया आर्थिक फैसला नुकसान दे सकता है।
- झगड़ा और बहस: इन दिनों मानसिक तनाव बढ़ सकता है, इसलिए किसी से बहस, झगड़ा या गुस्सा करने से बचें।
- तामसिक भोजन: मांस, शराब और ज्यादा मसालेदार भोजन से परहेज करें। सात्विक भोजन अपनाएं, इससे मन शांत रहता है।
- नकारात्मक सोच: आलस्य और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएं, वरना मन अशांत रह सकता है।
होलाष्टक में क्या करना चाहिए?
- रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- विष्णु सहस्त्रनाम का जप करना शुभ माना जाता है।
- पूजा-पाठ, ध्यान और भक्ति में समय लगाएं।
- सकारात्मक सोच रखें और बुरे विचारों से दूरी बनाएं।
- जरूरतमंदों की मदद करें और अच्छे कर्म करें।
होलाष्टक के ये आठ दिन आत्मसंयम, साधना और सावधानी के लिए होते हैं। इस दौरान संयमित जीवनशैली अपनाने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभावों से बचाव होता है। होली की खुशियों से पहले इन दिनों में खुद को शुद्ध और सकारात्मक बनाना ही होलाष्टक का असली उद्देश्य माना जाता है।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 23 February 2026 at 12:30 IST