Hanuman Jayanti 2026 Vrat Katha: हनुमान जयंती के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, सभी संकटों से मिलेगा छुटकारा

Hanuman Jayanti 2026 Vrat Katha: हनुमान जयंती का पावन पर्व संकटमोचन की कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर है। साल 2026 में बजरंगबली का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और कथा पढ़ने से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है। आइए जानते हैं।

Hanuman Jayanti 2026 Vrat Katha
Hanuman Jayanti 2026 Vrat Katha | Image: Meta AI

Hanuman Jayanti 2026 Vrat Katha: हिंदू पंचांग के हिसाब से हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। साल 2026 में भी भक्त अपने आराध्य 'संकटमोचन' का जन्मोत्सव मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और हनुमान जयंती व्रत कथा का श्रवण करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और मंगलकारी शक्तियों का संचार होता है। अगर आप लोग हनुमान जयंती के दिन व्रत रख रहे हैं तो इस दिन व्रत कथा पढ़ने का विशेष विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

हनुमान जयंती के दिन पढ़ें व्रत कथा 

शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी के जन्म के पीछे एक अत्यंत रोचक कथा है। प्राचीन काल में अंजना नाम की एक अप्सरा थीं, जिन्हें एक ऋषि के शाप के कारण वानर रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। इस शाप से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की।
उसी समय, अयोध्या के राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कर रहे थे। यज्ञ के अंत में अग्नि देव ने उन्हें जो खीर दी थी, उसका एक छोटा सा भाग एक चील लेकर उड़ गई। माता अंजना उस समय तपस्या में लीन थीं। 

वायु देव की प्रेरणा से वह प्रसाद माता अंजना के हाथों में गिर गया, जिसे उन्होंने शिव का आशीर्वाद मानकर ग्रहण कर लिया। इसी प्रसाद के प्रभाव से चैत्र पूर्णिमा के दिन केसरी नंदन हनुमान जी का जन्म हुआ।'अंजनी के लाल और पवनपुत्र के रूप में जन्में हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार माने जाते हैं।'

जब संकटमोचन ने बचाए भक्तों के प्राण

हनुमान जयंती के दिन इस कथा का विशेष महत्व है कि कैसे हनुमान जी ने बचपन में ही अपनी शक्ति का परिचय दिया था। एक बार भूख से व्याकुल होकर उन्होंने आकाश में चमकते हुए सूर्य को एक मीठा फल समझ लिया और उसे निगलने के लिए उड़ चले।उसी दिन राहु भी सूर्य को ग्रास बनाने वाला था, लेकिन हनुमान जी को देखकर वह भयभीत हो गया और इंद्र देव से सहायता मांगी। इंद्र ने क्रोध में आकर हनुमान जी पर 'वज्र' से प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी (हनु) पर चोट लगी और वे मूर्छित होकर गिर पड़े। 

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इससे वायु देव अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रह्मांड में वायु का प्रवाह रोक दिया। सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने वायु देव को शांत करने के लिए हनुमान जी को पुनः जीवित किया और उन्हें अद्भुत वरदान दिए। ब्रह्मा जी ने उन्हें दीर्घायु होने का वरदान दिया।इंद्र देव ने कहा कि उन पर कभी किसी अस्त्र-शस्त्र का प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं सूर्यदेव ने उन्हें अपना तेज प्रदान किया।यही कारण है कि उन्हें 'हनुमान' कहा गया और वे अष्ट सिद्धि एवं नवनिधि के दाता बने।

हनुमान जयंती के दिन पूजा का महत्व क्या है? 

हनुमान जयंती पर व्रत रखने और कथा सुनने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि शनि दोष और मंगल दोष से भी मुक्ति प्राप्त होती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By :
Aarya Pandey
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