अपडेटेड 7 February 2026 at 16:25 IST
Falgun Amavasya 2026: 16 या 17 फरवरी.. कब है फाल्गुन अमावस्या? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत का महत्व
Falgun Amavasya 2026 Date: फाल्गुन अमावस्या 2026 का दिन पितरों की कृपा पाने, दोषों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए बेहद शुभ माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन किए गए कर्म निश्चित रूप से शुभ फल प्रदान करते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Falgun Amavasya 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितरों को समर्पित होता है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितृलोक से हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्रद्धा की अपेक्षा करते हैं। इसलिए इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। फाल्गुन मास की अमावस्या तो और भी खास मानी जाती है, क्योंकि यह साल की अंतिम अमावस्या तिथियों में से एक होती है। तो चलिए जानते हैं कि साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा कैसे करनी चाहिए।
फाल्गुन अमावस्या 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि 16 फरवरी 2026, सोमवार की शाम 05:34 बजे से शुरू होकर 17 फरवरी 2026, मंगलवार की शाम 05:30 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उदया तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए फाल्गुन अमावस्या का व्रत, स्नान-दान और पूजा 17 फरवरी 2026, मंगलवार को की जाएगी। यही दिन पितरों के तर्पण और विशेष पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है।
क्यों खास है साल 2026 की फाल्गुन अमावस्या?
इस वर्ष फाल्गुन अमावस्या इसलिए भी खास है, क्योंकि इसी दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण 17 फरवरी 2026 को शाम 5:26 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इसका कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना जाएगा। ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी चिंता के इस दिन स्नान, दान, पूजा और पितरों का तर्पण कर सकते हैं।
फाल्गुन अमावस्या पर किसकी पूजा करें?
फाल्गुन अमावस्या के दिन मुख्य रूप से पितरों की पूजा और तर्पण किया जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए तर्पण से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल में भगवान विष्णु, भगवान शिव और ब्रह्मा जी का वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा तुलसी माता और शालिग्राम भगवान की पूजा भी अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
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फाल्गुन अमावस्या 2026 की पूजा विधि
फाल्गुन अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, तालाब या कुंड में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा प्रारंभ करें, ताकि पूजा में कोई विघ्न न आए। फिर भगवान विष्णु और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें और व्रत का संकल्प लें। इस दिन घर में गोमूत्र का छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
इसके बाद पितरों के लिए तर्पण करें। तर्पण के समय जल में काले तिल, कुश और चावल मिलाकर अपने पूर्वजों का स्मरण करें। तर्पण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। इससे पितरों को शांति मिलती है। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
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स्नान-दान का धार्मिक महत्व
फाल्गुन अमावस्या पर किया गया स्नान और दान विशेष पुण्य देने वाला माना गया है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, घी और धन का दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितर सूर्यास्त तक घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित रहते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए कर्मों को देखते हैं।
इस प्रकार, फाल्गुन अमावस्या 2026 का दिन पितरों की कृपा पाने, दोषों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए बेहद शुभ माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन किए गए कर्म निश्चित रूप से शुभ फल प्रदान करते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 7 February 2026 at 16:25 IST