Chaturmas 2026: आज से शुरू हुआ चातुर्मास, अगले 4 महीने तक भूलकर भी न करें काम; वरना भुगतना होगा भारी नुकसान
आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी यानी 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास की शुरुआत हो चुकी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। यह पवित्र समय 21 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगा।
- धर्म और अध्यात्म
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हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में चातुर्मास का विशेष महत्व माना गया है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जो कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक यानी पूरे चार महीनों तक चलता है। मान्यता है कि इन चार महीनों के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय जप, तप, साधना और आत्म-शुद्धि के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन शास्त्र अनुसार इस अवधि में कुछ कार्य पूरी तरह से वर्जित होते हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में भी ये गलतियां करता है, तो उसे जीवन में भारी आर्थिक, शारीरिक और मानसिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
चातुर्मास के दौरान क्या न करें?
चातुर्मास के दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और नामकरण जैसे शुभ व मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित होते हैं। माना जाता है कि भगवान विष्णु के निद्रालीन होने के कारण इन कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता।इन चार महीनों में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से बचें। छाछ और दही का सेवन न करें। दूध के सेवन से परहेज करें। बैंगन और बैंगन से बनी चीजों का त्याग करें। शास्त्रों के अनुसार, चातुर्मास में कोई नया बड़ा कारोबार शुरू करना या नई जमीन-जायदाद खरीदना शुभ नहीं माना जाता। इसमें सफलता मिलने में बाधाएं आती हैं।इस दौरान बाल कटवाना, नाखून काटना और पलंग पर सोना वर्जित माना गया है। जमीन पर बिस्तर लगाकर सोना और ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ फलदायी होता है।
नुकसान से बचने के लिए करें ये काम
चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। श्रीमद्भागवत कथा या शिवपुराण का पाठ करें, सात्विक भोजन ग्रहण करें और यथाशक्ति दान-पुण्य करें।शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति चातुर्मास के नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करता है, उसके पापों का नाश होता है और उसे आरोग्य, सुख-समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसलिए इन चार महीनों में नियमों का ध्यान रखें और किसी भी तरह के नुकसान से बचें।