अपडेटेड 19 March 2026 at 17:59 IST
Maa Brahmacharini Puja 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन करें माता ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें मुहूर्त से भोग तक सबकुछ
Maa Brahmacharini Puja 2026: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में पूजा मुहूर्त से लेकर विधि, मंत्र, भोग और आरती जानने के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें।
- धर्म और अध्यात्म
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Maa Brahmacharini Puja 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति की उपासना का समय है। नवरात्रि के दूसरे दिन मांदुर्गा के 'ब्रह्मचारिणी' स्वरूप की पूजा की जाती है। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। देवी का यह रूप अनंत फल देने वाला और भक्तों को कठिन संघर्षों में धैर्य बनाए रखने की शक्ति प्रदान करता है। आपको बता दें, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 20 मार्च यानी कि शुक्रवार को की जाएगी। इस दिन किस मुहूर्त और किस विधि से माता की पूजा करें और पूजा के दौरान किन मंत्रों का जाप करें? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है।
- तिथि - 20 मार्च 2026, शुक्रवार
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:49 से 05:37 तक
- अमृत काल- सुबह 08:15 से 09:44 तक
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा किस विधि से करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें और माँ की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं।
- माता को चंदन, अक्षत, धूप और दीपक अर्पित करें। उन्हें सफेद फूल बहुत प्रिय हैं।
- रुद्राक्ष की माला से माता के विशेष मंत्रों का जाप करें।
- मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा पढ़ें और घी के दीपक से आरती करें।
मां ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
मां ब्रह्मचारिणी को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे लंबी आयु और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दूसरे दिन के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है। यह रंग प्रकृति, विकास और शांति का प्रतीक माना जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र
- दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ - या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की आरती जरूर करें?
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के बाद आरती जरूर करें। क्योंकि आरती के बिनी पूजा अधूरी मानी जाती है।
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 19 March 2026 at 17:59 IST