Apara Ekadashi Niyam: आप भी रखने जा रहे हैं अपरा एकादशी का व्रत, तो जान लें पूजा की सही विधि और नियम

हिंदू धर्म में एकादशी (Ekadashi) का बेहद खास महत्व माना जाता है। ऐसे में इस व्रत के नियम और पूजा की सही विधि के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।

Ekadashi
अपरा एकादशी नियम | Image: Shutterstock

Apara Ekadashi Vrat Niyam: जगत के पालन हार श्रीहरि विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है। वैसे तो हर महीने के कृष्ण और शुक्ल दोनों ही पक्षों में एकादशी तिथि पड़ती है, लेकिन हर एकादशी का नाम और महत्व अलग-अलग होता है। साथ ही इनके नियम और पूजा की विधि भी अलग होती है। इसी कड़ी में अपरा एकादशी पड़ने वाली है, तो चलिए जानते हैं कि इस दिन पूजा की विधि और नियम क्या है।

हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। पंचांग के मुताबिक इस साल इस तिथि की शुरुआत 2 जून दिन रविवार की सुबह 5 बजकर 4 मिनट पर होगी, जो 3 जून दिन सोमवार की रात 2 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। इस बार यह दोनों ही दिन उदयातिथि में पड़ रही है, ऐसे में गृहस्थ लोग 2 जून को अपरा एकादशी का व्रत रखेंगे वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोग 3 जून को यह व्रत रखेंगे।

अपरा एकादशी पूजा विधि

  • अपरा एकादशी के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • इसके बाद एक चौकी लगाएं और उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर श्रीमन नारायण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • फिर इन्हें पंचामृत, रोली, मोली, गोपी चन्दन, अक्षत, पीले पुष्प, तुलसी पत्र, ऋतुफल, मिष्ठान आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद धूप-दीप से आरती उतारकर दीप दान करें।
  • इस बार एकादशी तिथि रविवार को पड़ रही है। ऐसे में तुलसी पत्र एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

अपरा एकादशी के नियम

  • अपरा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन शुभ रंगों के साफ-सुधरे कपड़े पहनने चाहिए।
  • व्रती व्यक्ति को मन में भगवान विष्णु की छवि का ध्यान करते हुए 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ' का जप और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष रूप से इस दिन बहुत फलदायी है।
  • इस दिन भक्तों को परनिंदा, छल-कपट, लालच, द्धेष की भावनाओं से दूर रहकर श्रीनारायण को ध्यान में रखते हुए भक्तिभाव से उनका भजन करना चाहिए।
  • इस दिन आप फलाहार करें। भूलकर भी तामसिक भोजन और चावल नहीं खाएं।
  • इस दिन किसी का दिया हुआ अन्न आदि नहीं खाना चाहिए।
  • अपरा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद पारण करना चाहिए।  

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Published By:
 Sadhna Mishra
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