अपडेटेड 26 February 2026 at 12:04 IST
Amalaki Ekadashi 2026 Upay: आमलकी एकादशी के दिन जरूर करें आंवले और तुलसी से जुड़े ये खास उपाय, चमक जाएगी आपका किस्मत
Amalaki Ekadashi 2026 Upay: हिंदू धर्म में आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। अब ऐसे में इस दिन आंवले और तुलसी से जुड़े कुछ ऐसे उपाय हैं, जिसे करने से उत्तम परिणाम मिल सकते हैं। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Amalaki Ekadashi 2026 Upay: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी जिसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है अपने आप में बेहद खास है। वर्ष 2026 में यह शुभ तिथि 28 फरवरी को पड़ रही है।
आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और 'आंवले' के वृक्ष की पूजा का विधान है।
शास्त्रों के अनुसार, आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। यदि इस दिन आंवले और तुलसी से जुड़े कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो न केवल आर्थिक तंगी दूर होती है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन भी होता है।
आंवले के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करें
आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भगवान विष्णु का पूजन करें। एक लोटे में जल, कच्चा दूध और रोली मिलाकर पेड़ की जड़ में अर्पित करें। इसके बाद पेड़ की 21 या 108 बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से कुंडली के दोष शांत होते हैं और अटके हुए काम बनने लगते हैं।
तुलसी और आंवले की पूजा का महत्व
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है और आंवला उनका स्वरूप माना जाता है। इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। साथ ही, श्रीहरि को भोग लगाते समय उसमें तुलसी दल और आंवला जरूर शामिल करें।इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और लक्ष्मी जी का स्थायी वास होता है।
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आंवले का दान और सेवन करने से होगा लाभ
एकादशी के दिन आंवले का दान करना स्वर्ण दान के समान पुण्यकारी माना गया है। यदि संभव हो तो इस दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को आंवले का फल या आंवले का पौधा दान करें। साथ ही, स्वयं भी प्रसाद के रूप में आंवले का सेवन करें।
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आमलकी एकादशी के दिन तुलसी का करें ये उपाय
एक पीले कपड़े में 5 या 7 तुलसी दल रखकर उसे भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। पूजा के बाद इस पोटली को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय धन की आवक बढ़ाता है और फिजूलखर्ची पर रोक लगाता है।
क्यों खास है आमलकी एकादशी का व्रत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया, उसी समय आंवले के वृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के वैवाहिक उल्लास रंगभरी एकादशी से भी जुड़ा है, इसलिए यह भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 26 February 2026 at 12:04 IST