National Handloom Day 2026: हैंडलूम डे पर PM मोदी ने Insta VIDEO शेयर कर लोगों से की ये अपील, कहा- हैंडलूम से कुछ ना कुछ खरीदें ताकि गरीब परिवार...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 7 अगस्त को 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' नेशनल हैंडलूम डे पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाने की विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग एक-दूसरे को फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं देते हैं और इसे धूमधाम से मनाते हैं, ठीक उसी उमंग और जज्बे के साथ हमें अपने देश के हथकरघा उद्योग का उत्सव भी मनाना चाहिए।
- प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अगस्त को 'राष्ट्रीय हथकरघा दिवस' के अवसर पर देशवासियों से इसे पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह लोग फ्रेंडशिप डे मनाते हैं, उसी भावना से हमें अपने देश की समृद्ध हथकरघा विरासत का उत्सव भी मनाना चाहिए। हथकरघा उत्पादों को अपनाने का सीधा अर्थ हमारे गरीब बुनकर परिवारों के जीवन को आर्थिक संबल प्रदान करना है।
7 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व और स्वदेशी आंदोलन
7 अगस्त की तारीख भारत के इतिहास में बेहद खास स्थान रखती है। इसी दिन, यानी 7 अगस्त 1905 को देश में 'स्वदेशी आंदोलन' की शुरुआत हुई थी। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ी गई इस ऐतिहासिक लड़ाई में जन-जन की भागीदारी थी और यहीं से आत्मनिर्भर भारत की वास्तविक नींव पड़ी थी। स्वदेशी आंदोलन की इसी ऐतिहासिक स्मृति को संजोने और भारतीय कारीगरों की कला को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से इस दिन को हथकरघा दिवस के रूप में चुना गया।
'एक्स' पर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों से अपनी पसंदीदा हथकरघा वस्तुओं के वीडियो और तस्वीरें साझा करने का आग्रह किया है। नागरिक अपने पसंदीदा हैंडलूम प्रोडक्ट्स के GRWN वीडियो सहित बनाकर पोस्ट करें।पोस्ट करते समय #NationalHandloomDay हैशटैग का उपयोग करना न भूलें। सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय हथकरघा उत्पादों का प्रचार करने से दुनिया भर में हमारे स्थानीय बुनकरों के हुनर और सामर्थ्य का परिचय मिलेगा।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत और इसका उद्देश्य
भारत में पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त 2015 को मनाया गया था। इसका आधिकारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई, तमिलनाडु में किया था। तब से लेकर हर साल यह विशेष दिन भारत के बुनकर समुदाय के अमूल्य योगदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बुनकरों की भूमिका को पहचान देना, भारत की सदियों पुरानी कपड़ा संस्कृति को संरक्षित करना और स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाना है।