Heart Attack: झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार की अचानक मौत... तो जानिए अगर किसी को हार्ट अटैक आए तो तुरंत क्या करना चाहिए, जिससे बच सके जान
झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन ने एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के गंभीर खतरों की ओर ध्यान खींचा है। ऐसी आपातकालीन स्थितियों में सही समय पर मिली मदद और प्राथमिक उपचार किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। आइए जानते हैं कि अगर हार्ट अटैक आए तो क्या करना चाहिए?
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार की अचानक हुई मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिल का दौरा किसी भी समय और किसी को भी अपना शिकार बना सकता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी , तनाव और अनियमित खानपान के कारण दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हार्ट अटैक के दौरान शुरुआती एक घंटा, जिसे 'गोल्डन आवर' कहा जाता है, मरीज की जान बचाने के लिए सबसे अहम होता है। अगर आपके सामने किसी को हार्ट अटैक आ जाए, तो घबराने के बजाय तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाकर आप एक जान बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कि हार्ट अटैक के लक्षण को कैसे पहचानें और क्या करना चाहिए।
हार्ट अटैक के लक्षण को कैसे पहचानें?
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लक्षणों को तुरंत पहचानना सबसे जरूरी है।
सीने के बीचों-बीच या बायीं तरफ तेज दर्द, जकड़न और भारीपन महसूस होना।
दर्द का सीने से होकर बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैलना।
बिना कोई मेहनत किए अचानक बहुत अधिक पसीना आना खासकर ठंडे पसीने।
सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होना या घबराहट महसूस होना।
चक्कर आना, उल्टी जैसा महसूस होना या अचानक आंखों के सामने अंधेरा छा जाना।
हार्ट अटैक आने पर तुरंत उठाएं ये कदम
लक्षणों को पहचानते ही सबसे पहले आपको बिना कोई देरी किए एंबुलेंस को बुलाएं। आप 108 या 112 पर कॉल करें। इस दौरान खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल ले जाने से बचें। क्योंकि एंबुलेंस में ऑक्सीजन और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम मौजूद होता है।
पीड़ित को तुरंत जमीन पर या किसी सुरक्षित जगह पर बिठा दें। उसके घुटनों को मोड़कर रखें (W-पोजीशन) ताकि दिल पर रक्त संचार का दबाव कम हो सके। मरीज को बिल्कुल भी चलने-फिरने न दें।
मरीज की शर्ट के बटन खोल दें, बेल्ट या टाई तुरंत ढीली कर दें ताकि उसे आसानी से ताजी हवा मिल सके और सांस लेने में कोई परेशानी न हो। भीड़ जमा न होने दें।
अगर मरीज होश में है और उसे एस्पिरिन से कोई एलर्जी नहीं है, तो उसे तुरंत 300 mg की एस्पिरिन की गोली चबाने के लिए दें। पानी के साथ निगलने के बजाय इसे चबाना ज्यादा असरदार होता है, क्योंकि यह खून के थक्के को बनने से रोकती है।
अगर मरीज बेहोश हो जाए तो क्या करें?
अगर मरीज अचानक बेहोश हो जाता है और उसकी सांस या पल्स नहीं चल रही है, तो तुरंत सीपीआर देना शुरू करें।
छाती के बीचों-बीच अपने दोनों हाथ रखकर तेजी से और गहराई से दबाव डालें एक मिनट में लगभग 100-120 बार की गति से। जब तक मेडिकल मदद न पहुंच जाए या मरीज को होश न आ जाए, सीपीआर देना बिल्कुल न रोकें।
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Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं। REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।