Cooking Oil: सरसों का तेल, ऑलिव या रिफाइंड ऑयल... घर में खाना बनाने के लिए कौन सा तेल सही है?

Cooking Oil Vs Mustard Oil: आजकल बाजार में रिफाइंड कुकिंग ऑयल जैसे सनफ्लावर, सोयाबीन, या राइस ब्रान की भरमार है, लेकिन भारतीय रसोइयों में सरसों का तेल सदियों से राज कर रहा है। स्वास्थ्य के लिहाज से दोनों में काफी अंतर है। आइए जानते हैं कि आपकी सेहत के लिए कौन सबसे ज्यादा बेस्ट है?

Cooking Oil vs Mustard Oil which is good for your health kon sa tel aapki sehat ke liye accha hai
Cooking Oil vs Mustard Oil which is good for your health kon sa tel aapki sehat ke liye accha hai | Image: Freepik

Cooking Oil Vs Mustard Oil: आज के समय में फिट और बीमारियों से दूर रहना हर किसी की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए हम अपनी डाइट पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन एक चीज़ जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वह है हमारा कुकिंग ऑयल। बाज़ार में आज रिफाइंड कुकिंग ऑयल सोयाबीन, सनफ्लावर, पाम ऑयल की भरमार है, वहीं दूसरी ओर हमारा पारंपरिक सरसों का तेल है। आइए जानते हैं कि सेहत के लिहाज से इन दोनों में से कौन सा आपके लिए बेहतर है।

रिफाइंड कुकिंग ऑयल दिखने में साफ, सेहत में भारी?

ज्यादातर सामान्य कुकिंग ऑयल को हाई हीट और केमिकल्स के जरिए रिफाइंड किया जाता है। इस प्रक्रिया से तेल का रंग और गंध तो चली जाती है, लेकिन इसके साथ ही इसके प्राकृतिक पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। रिफाइंड ऑयल में ट्रांस फैट्स और ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है। अगर शरीर में ओमेगा-6 बहुत ज्यादा हो जाए, तो यह अंदरूनी सूजन का कारण बनता है, जिससे दिल की बीमारियां, मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

सरसों का तेल आपकी सेहत का खजाना

भारतीय रसोइयों में सदियों से इस्तेमाल होने वाला सरसों का तेल सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। कच्ची घानी विधि से निकाले जाने के कारण इसके सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (PUFA) भरपूर मात्रा में होते हैं। यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का सही संतुलन: इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में होता है, जो जोड़ों के दर्द को कम करने और दिमागी विकास में मदद करता है। सरसों के तेल में मौजूद एलिल आइसोथियोसाइनेट नामक तत्व शरीर को फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन से बचाता है।

कौन सा है बेहतर?

अगर बीमारियों से दूर रहने की बात हो, तो पारंपरिक कच्ची घानी सरसों का तेल रिफाइंड कुकिंग ऑयल के मुकाबले कहीं अधिक सेहतमंद है। इसका स्मोकिंग पॉइंट भी हाई होता है, जिसका मतलब है कि तेज आंच पर पकाने पर भी यह जहरीले तत्व नहीं छोड़ता है। आपको बता दें, रिफाइंड केमिकल्स वाले आधुनिक तेलों को छोड़कर सरसों के तेल को अपनी डाइट में शामिल करें। यह न सिर्फ आपके खाने का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि आपको और आपके परिवार को दिल की बीमारियों और लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य दिक्कतों से भी दूर रखेगा।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं।  REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

Published By:
 Aarya Pandey
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