अपडेटेड 7 January 2026 at 14:31 IST
Chanakya Niti For Happy Life: रिश्तेदारों से भूलकर भी न शेयर करें ये 9 राज, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
Chanakya Niti For Relatives: चाणक्य नीति हमें सिखाती है कि कम बोलना और सोच-समझकर बोलना ही समझदारी है। रिश्तेदारों से दूरी नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही समय पर सही बात कहना ही रिश्तों को मजबूत और जीवन को सुखी बनाता है।
- लाइफस्टाइल न्यूज़
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Avoid Sharing These Things With Relatives According To Chanakya: चाणक्य नीति में जीवन को सुखी और संतुलित रखने के कई अहम सूत्र बताए गए हैं। चाणक्य के अनुसार, रिश्तेदार भले ही परिवार का हिस्सा होते हैं, लेकिन उनके साथ हर बात साझा करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। जरूरत से ज्यादा खुलापन कई बार प्राइवेसी पर असर डालता है और रिश्तों में तनाव भी पैदा कर सकता है। तो चलिए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे 9 बातें, जिन्हें रिश्तेदारों के सामने कभी नहीं कहना चाहिए।
पैसों से जुड़ी जानकारी
रिश्तेदारों के सामने अपनी कमाई, बचत या कर्ज के बारे में खुलकर बात करना नुकसानदेह हो सकता है। इससे लोगों के मन में लालच या गलत उम्मीदें पैदा हो सकती हैं और उनका व्यवहार बदल सकता है।
अपने निजी फैसले
अपने निजी फैसलों, योजनाओं या भरोसेमंद दोस्तों से जुड़ी बातें रिश्तेदारों से साझा न करें। चाणक्य के अनुसार, यह जोखिम भरा हो सकता है और भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है।
घर के विवाद
घर में चल रहे झगड़े, आपसी मतभेद या पारिवारिक कलह को बाहर बताने से समस्या और बढ़ सकती है। ऐसी बातें फैलने से रिश्तों में दूरी और गलतफहमियां पैदा होती हैं।
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स्वास्थ्य संबंधी कमजोरियां
अपनी या परिवार की बीमारियों और कमजोरियों को हर किसी से साझा करना ठीक नहीं। यह जानकारी अफवाह का रूप ले सकती है या लोग इसका गलत फायदा उठा सकते हैं।
नौकरी या व्यापार की असफलताएं
कामकाज या व्यापार में आई असफलताओं को रिश्तेदारों के सामने खुलकर बताने से मजाक या आलोचना झेलनी पड़ सकती है। चाणक्य कहते हैं कि अपनी कमजोरियों को संभालकर रखना ही समझदारी है।
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भविष्य की योजनाएं
निवेश, यात्रा या बड़े फैसलों की जानकारी पहले ही साझा करना सही नहीं होता। कई बार दूसरों की सलाह भ्रम और दबाव बढ़ा देती है।
अतीत की गलतियां
पुरानी गलतियों या भूलों को बार-बार दोहराने से आपकी छवि खराब हो सकती है और आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ता है। इससे रिश्तों में भरोसा भी कम होता है।
भावनात्मक कमजोरियां
अपने डर, असुरक्षा और निजी परेशानियों को रिश्तेदारों के सामने जाहिर करना नुकसानदेह हो सकता है। हर कोई आपकी भावनाओं को समझे, यह जरूरी नहीं।
तुलना करना
किसी रिश्तेदार की तुलना दूसरे से करना या किसी की तारीफ किसी और के सामने करना जलन और विवाद को जन्म दे सकता है। चाणक्य के अनुसार, तुलना रिश्तों को खोखला बना देती है।
चाणक्य नीति हमें सिखाती है कि कम बोलना और सोच-समझकर बोलना ही समझदारी है। रिश्तेदारों से दूरी नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही समय पर सही बात कहना ही रिश्तों को मजबूत और जीवन को सुखी बनाता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 7 January 2026 at 14:31 IST