अपडेटेड 21 February 2026 at 18:14 IST

योग धर्म और राष्ट्र धर्म: जिम्मेदार नेतृत्व की दिशा

स्वामी रामदेव के अनुसार योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि 'योग धर्म' और 'राष्ट्र धर्म' का संगम है। जानें कैसे व्यक्तिगत अनुशासन और मानसिक स्थिरता के माध्यम से पतंजलि का दृष्टिकोण एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे रहा है।

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Swami Ramdev Yoga Dharma and Rashtra Dharma
Swami Ramdev Yoga Dharma and Rashtra Dharma | Image: Social Media

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति है। स्वामी रामदेव के अनुसार योग धर्म और राष्ट्र धर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पतंजलि के दृष्टिकोण में व्यक्तिगत अनुशासन से ही राष्ट्रीय शक्ति का निर्माण होता है।

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योग धर्म का अर्थ है सत्य, अनुशासन और सेवा के सिद्धांतों का पालन। स्वामी रामदेव बताते हैं कि जब व्यक्ति नियमित योगाभ्यास करता है, तो उसमें आत्मसंयम और धैर्य विकसित होता है। यही गुण नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं।

राष्ट्र धर्म केवल देशभक्ति के नारों तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक समरसता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़ा है। पतंजलि के विभिन्न प्रयास इसी दिशा में कार्य करते हैं।

योग मानसिक स्थिरता प्रदान करता है, जिससे निर्णय क्षमता बेहतर होती है। नेतृत्व में यह गुण अत्यंत आवश्यक है।

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निष्कर्ष

योग धर्म और राष्ट्र धर्म का समन्वय समाज को मजबूत बनाता है। स्वामी रामदेव का संदेश है कि जब व्यक्ति स्वयं संतुलित होगा, तभी राष्ट्र सशक्त होगा।

Published By : Shashank Kumar

पब्लिश्ड 21 February 2026 at 18:14 IST