अपडेटेड 8 January 2026 at 19:31 IST
प्रचंड ठंड से शरीर की रक्षा और स्वदेशी के माध्यम से राष्ट्र सेवा
प्रचंड ठंड के बढ़ते प्रकोप के बीच योग गुरु स्वामी रामदेव ने स्वास्थ्य रक्षा के लिए योग, आयुर्वेद और स्वदेशी उपायों को अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक जीवनशैली और स्वदेशी उत्पाद न केवल इम्युनिटी बढ़ाते हैं, बल्कि राष्ट्र सेवा का भी सशक्त माध्यम हैं।
- इनिशिएटिव
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जैसे-जैसे देश के विभिन्न हिस्सों में सर्दी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे यह मानव स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण जीवनशैली के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। हाल ही में योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने संबोधन में प्रचंड ठंड से बचाव के लिए प्राकृतिक, योगिक और स्वदेशी उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि स्वदेशी को अपनाना भारत माता की सच्ची सेवा है।
प्रचंड ठंड का स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वामी रामदेव के अनुसार अत्यधिक ठंड शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। इसके कारण सर्दी-जुकाम, खांसी, जोड़ों में दर्द, श्वसन संबंधी समस्याएं और आलस्य जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं।
ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे मेटाबॉलिज़्म धीमा पड़ता है। इससे गठिया, अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियां और अधिक उग्र हो सकती हैं। ऐसे में सर्दियों के दौरान विशेष सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए। स्वामी रामदेव केवल बाहरी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने पर विशेष बल देते हैं। उनका मानना है कि योग और आयुर्वेद के माध्यम से मौसमी बदलावों के दौरान शरीर में संतुलन बनाए रखा जा सकता है। प्रतिदिन कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और सूर्य नमस्कार जैसे योगाभ्यास शरीर में ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं। ये योगाभ्यास न केवल सर्दी से होने वाली बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करते हैं।
आयुर्वेदिक औषधियों और आहार की भूमिका
आयुर्वेद में सर्दियों के लिए प्रभावशाली और समय-परीक्षित उपाय उपलब्ध हैं। स्वामी रामदेव गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी और आंवला जैसी औषधियों के नियमित सेवन की सलाह देते हैं। ये औषधियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में सहायक होती हैं। सर्दियों में हर्बल काढ़ा, हल्दी वाला दूध और मौसमी फल शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ पाचन शक्ति को मजबूत करते हैं। इसके अलावा देशी घी, साबुत अनाज, मेवे, गुड़ और गर्म भोजन को सर्दियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है। स्वामी रामदेव सर्दियों में स्वास्थ्य की देखभाल को एक व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ते हैं—स्वदेशी अभियान। उनका मानना है कि जब हम भारतीय उत्पादों, विशेषकर आयुर्वेद और स्वास्थ्य से जुड़े स्वदेशी उत्पादों को अपनाते हैं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और किसानों, कारीगरों तथा स्वदेशी उद्योगों को सीधा समर्थन मिलता है।
स्वदेशी आयुर्वेदिक उत्पादों को अपनाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। स्वामी रामदेव इसे भारत माता की सेवा का प्रभावी माध्यम मानते हैं।
सर्दियों में अनुशासित जीवनशैली का महत्व
ठंड के मौसम में अनुशासित दिनचर्या अपनाना अत्यंत आवश्यक है। स्वामी रामदेव प्रातः जल्दी उठने, ठंडे पानी से बचने, पर्याप्त गर्म वस्त्र पहनने और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखने की सलाह देते हैं।
सुबह की धूप में बैठना शरीर को विटामिन-डी प्रदान करता है, जिससे इम्युनिटी बढ़ती है। इसके साथ ही जंक फूड, अत्यधिक चीनी और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि ये पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं।
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स्वास्थ्य और राष्ट्र सेवा का समग्र संदेश
स्वामी रामदेव का संदेश केवल सर्दियों से बचाव तक सीमित नहीं है। वे नागरिकों से आग्रह करते हैं कि योग, आयुर्वेद और स्वदेशी को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
उनके अनुसार स्वस्थ शरीर, अनुशासित मन और स्वदेशी के प्रति प्रतिबद्धता ही सच्ची राष्ट्र सेवा का आधार है। प्राकृतिक उपायों से प्रचंड ठंड से स्वयं की रक्षा कर और स्वदेशी को अपनाकर हम न केवल अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा करते हैं, बल्कि भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में भी सक्रिय योगदान देते हैं।
Published By : Kirti Soni
पब्लिश्ड 8 January 2026 at 18:57 IST